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AIIMS कैफे में छात्रों से मिले LG संधू मेडिकल शिक्षा पर हुई चर्चा

Ratna Netam
3 Oct 2026 6:43 PM IST
AIIMS कैफे में छात्रों से मिले LG संधू मेडिकल शिक्षा पर हुई चर्चा
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नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शनिवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के एक कैफे में मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ अनौपचारिक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने मेडिकल शिक्षा से जुड़ी चुनौतियों, भारत के हेल्थकेयर सेक्टर को लेकर युवाओं की उम्मीदों और सुरक्षा से संबंधित चिंताओं पर उनकी राय जानी। बातचीत में खास तौर पर महिला छात्रों और डॉक्टरों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी सुना गया।उपराज्यपाल ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। उन्होंने बताया कि AIIMS के कैफे में मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ कॉफी के दौरान खुलकर बातचीत हुई। उन्होंने छात्रों से मेडिकल शिक्षा के दौरान सामने आने वाली मुश्किलों और अस्पतालों में काम करने के अनुभवों के बारे में जानकारी ली।
मेडिकल शिक्षा की चुनौतियों पर चर्चा
मेडिकल शिक्षा देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक क्षेत्रों में शामिल है। MBBS से लेकर पोस्टग्रेजुएट और सुपर स्पेशियलिटी प्रशिक्षण तक छात्रों और डॉक्टरों को लंबे समय तक अध्ययन, क्लिनिकल ट्रेनिंग और अस्पतालों में व्यावहारिक अनुभव से गुजरना पड़ता है।AIIMS नई दिल्ली में भी बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र, पीजी छात्र और रेजिडेंट डॉक्टर प्रशिक्षण लेते हैं। संस्थान की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यहां विभिन्न विभागों में सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर कार्यरत हैं।संधू ने बातचीत के दौरान मेडिकल छात्रों से उनकी रोजमर्रा की चुनौतियों को समझने की कोशिश की। इसमें पढ़ाई का दबाव, क्लिनिकल ट्रेनिंग, अस्पताल में काम का अनुभव और भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान से जुड़े विषय शामिल रहे।उन्होंने छात्रों की बातों को सीधे सुनने पर जोर दिया। इस तरह की अनौपचारिक बातचीत का उद्देश्य संस्थानों में पढ़ने और काम करने वाले युवाओं की समस्याओं को उनके नजरिए से समझना है।
हेल्थकेयर सेक्टर के भविष्य पर भी बातचीत
बातचीत के दौरान भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों की उम्मीदों पर भी चर्चा हुई। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, आधुनिक चिकित्सा तकनीक, मेडिकल रिसर्च और मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण उपचार पहुंचाना ऐसे विषय हैं जिन पर युवा डॉक्टरों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।मेडिकल छात्रों से यह जानने की कोशिश की गई कि वे देश के हेल्थकेयर सिस्टम को भविष्य में किस रूप में देखते हैं और इसमें किन बदलावों की जरूरत महसूस करते हैं। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल, तकनीक के इस्तेमाल और रिसर्च को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे भी इस व्यापक चर्चा से जुड़े रहे।AIIMS नई दिल्ली शिक्षा, शोध और मरीजों की देखभाल के क्षेत्र में देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। संस्थान की परीक्षा और अकादमिक व्यवस्थाएं MBBS, नर्सिंग, पोस्टग्रेजुएट और अन्य चिकित्सा कार्यक्रमों से जुड़ी हैं।
महिला सुरक्षा को लेकर चिंताएं
मुलाकात का एक अहम हिस्सा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा। खासकर महिला छात्रों और डॉक्टरों को आने वाली सुरक्षा संबंधी परेशानियों के बारे में उपराज्यपाल ने जानकारी ली।दिल्ली में हाल के दिनों में छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बैठकें और समीक्षा हुई हैं। 30 सितंबर को संधू ने दिल्ली विश्वविद्यालय के महिला कॉलेजों के प्राचार्यों के साथ भी बैठक की थी। इसमें कॉलेज परिसरों और आने-जाने वाले रास्तों पर रोशनी, CCTV, पुलिस गश्त, सुरक्षित परिवहन, अतिक्रमण और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी जैसी समस्याओं पर चर्चा हुई थी।उस बैठक में कॉलेजों के आसपास अंधेरे स्थान, असुरक्षित पार्क, सार्वजनिक परिवहन की कमी और कुछ इलाकों में सुरक्षा संबंधी समस्याओं को प्रमुख चिंताओं के तौर पर सामने रखा गया था। संधू ने संबंधित विभागों को स्ट्रीट लाइट, CCTV कवरेज और पुलिस पेट्रोलिंग मजबूत करने के निर्देश भी दिए थे।
छात्रों से सीधे संवाद पर जोर
AIIMS में हुई बातचीत की खास बात यह रही कि उपराज्यपाल ने छात्रों और डॉक्टरों से सीधे उनके अनुभव सुने। औपचारिक बैठक के बजाय कैफे में हुई बातचीत का स्वरूप अपेक्षाकृत अनौपचारिक रहा। इससे छात्रों को अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे साझा करने का अवसर मिला।मेडिकल क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों और रेजिडेंट्स को लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ सकती है। ऐसे में संस्थान के भीतर और बाहर सुरक्षित वातावरण, पर्याप्त सुविधाएं और बेहतर सहायता व्यवस्था उनके लिए महत्वपूर्ण होती है।
AIIMS में सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा में
AIIMS की ओर से हाल में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने से संबंधित कदम भी उठाए गए हैं। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर सितंबर में ‘Strengthening Safety at AIIMS’ से जुड़ा नोटिस जारी किया गया था, जिसमें क्विक रिस्पॉन्स टीमों को अधिक सतर्क और सक्रिय करने की जानकारी दी गई थी।ऐसे में छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों से सुरक्षा संबंधी फीडबैक लेना संस्थान के मौजूदा सुरक्षा उपायों और उनकी जमीनी जरूरतों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में युवाओं की भूमिका
भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के विस्तार में युवा डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की भूमिका अहम है। देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ नए डॉक्टरों की संख्या बढ़ रही है, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने की जरूरत भी बनी हुई है।मेडिकल छात्रों के साथ बातचीत के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र में भविष्य की उनकी भूमिका और अपेक्षाओं को समझना इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। तकनीकी बदलावों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और रिसर्च के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डॉक्टरों की शिक्षा और प्रशिक्षण में भी बदलाव हो रहे हैं।
अनौपचारिक बातचीत का संदेश
AIIMS के कैफे में हुई मुलाकात के जरिए उपराज्यपाल ने छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ सीधे संवाद का अवसर बनाया। बातचीत में मेडिकल शिक्षा की कठिनाइयों से लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र की संभावनाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं तक कई मुद्दे सामने आए।विशेष रूप से महिला छात्रों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सुनना दिल्ली में हाल के प्रशासनिक प्रयासों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। महिला कॉलेजों और मेडिकल संस्थानों में सुरक्षा को लेकर सामने आने वाली समस्याओं पर प्रशासन पहले से समीक्षा कर रहा है।फिलहाल AIIMS में हुई बातचीत के दौरान छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा रखे गए सभी सुझावों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, उपराज्यपाल की इस पहल से यह संकेत मिलता है कि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े युवाओं के अनुभवों को सीधे सुनने पर ध्यान दिया जा रहा है।
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