दिल्ली-एनसीआर

सरकारी योजनाओं में निजी भागीदारी पर LG संधू ने कही बड़ी बात

Ratna Netam
13 Oct 2026 5:29 PM IST
सरकारी योजनाओं में निजी भागीदारी पर LG संधू ने कही बड़ी बात
x
नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि पीपीपी को केवल सरकारी परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के वैकल्पिक माध्यम के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे ऐसी व्यवस्था के रूप में अपनाना चाहिए, जिसमें सार्वजनिक हित, निजी क्षेत्र की कार्यक्षमता और स्पष्ट जवाबदेही को एक साथ जोड़ा जा सके।दिल्ली के द्वारका स्थित गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) में आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि हर सरकारी सेवा और परियोजना के लिए पीपीपी मॉडल उपयुक्त नहीं होता। किसी भी परियोजना में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करने से पहले उसकी प्रकृति, जरूरतों और नागरिकों की अपेक्षाओं का आकलन करना जरूरी है।
PPP मॉडल को लेकर अधिकारियों को दी सलाह
उपराज्यपाल संधू ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को पीपीपी परियोजनाओं का चयन करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए। इनमें संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण की कार्यक्षमता, निजी क्षेत्र की भागीदारी की संभावनाएं और परियोजना से जुड़े जोखिमों का उचित बंटवारा शामिल है।उन्होंने कहा कि केवल वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता को आधार बनाकर पीपीपी मॉडल अपनाने का फैसला नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी परियोजना में यह देखना जरूरी है कि उसके माध्यम से नागरिकों को किस प्रकार की सेवाएं मिलेंगी और उनकी गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
निजी क्षेत्र की क्षमता का सही इस्तेमाल जरूरी
संधू ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के पास तकनीकी विशेषज्ञता, प्रबंधन क्षमता और संसाधन उपलब्ध होते हैं, जिनका उपयोग सार्वजनिक परियोजनाओं में किया जा सकता है।हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ जिम्मेदारियों और जवाबदेही का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए।उन्होंने कहा कि पीपीपी व्यवस्था का उद्देश्य केवल परियोजनाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को बेहतर बनाना भी होना चाहिए।
हर सरकारी परियोजना के लिए सही नहीं PPP मॉडल
उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि पीपीपी मॉडल को सभी सार्वजनिक सेवाओं का एकमात्र समाधान नहीं माना जा सकता।उन्होंने कहा कि कुछ परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी उपयोगी हो सकती है, जबकि अन्य परियोजनाओं के लिए सरकारी प्रबंधन अधिक उपयुक्त हो सकता है।इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों को प्रत्येक परियोजना की आवश्यकताओं का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करना चाहिए। परियोजना की प्रकृति और उससे जुड़े संभावित जोखिमों को ध्यान में रखकर ही भागीदारी का मॉडल तय करना उचित होगा।
जिम्मेदारियों और जोखिमों का सही बंटवारा जरूरी
क्षमता निर्माण कार्यक्रम के दौरान संधू ने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी की सफलता के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण आवश्यक है।किस संस्था को कौन सा काम करना है, परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी किसके पास होगी और संभावित जोखिमों का प्रबंधन कैसे किया जाएगा, इन विषयों पर पहले से स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक हित से जुड़े निर्णयों में जवाबदेही बनी रहे। साथ ही परियोजनाओं के परिणाम नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों।
द्वारका में आयोजित हुआ क्षमता निर्माण कार्यक्रम
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का विषय 'सार्वजनिक-निजी भागीदारी का लाभ उठाना: नीति, मानक, साझेदारी ढांचा और परिणाम' था।कार्यक्रम में पीपीपी मॉडल की उपयोगिता, परियोजनाओं के मूल्यांकन और सार्वजनिक सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया।विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 13 अक्टूबर को उपराज्यपाल के दौरे से संबंधित सूचना दर्ज है।
नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता देने पर जोर
उपराज्यपाल संधू ने कहा कि सार्वजनिक परियोजनाओं की योजना बनाते समय नागरिकों की अपेक्षाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं में उपयुक्त साझेदारी मॉडल चुनने, संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने और परिणामों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।उनके संबोधन का प्रमुख संदेश यह रहा कि पीपीपी मॉडल की सफलता केवल निवेश या निजी भागीदारी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सार्वजनिक हित, स्पष्ट जिम्मेदारियों और बेहतर सेवाओं पर भी निर्भर करती है।
Next Story