दिल्ली-एनसीआर

वैध दुकानें बंद, अवैध पटाखा विक्रेताओं की बिक्री जारी

nidhi
7 Nov 2026 8:07 AM IST
वैध दुकानें बंद, अवैध पटाखा विक्रेताओं की बिक्री जारी
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पटाखों की बिक्री पर समयसीमा खत्म
नई दिल्ली: दीपावली से पहले दिल्ली में पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय समयसीमा शुक्रवार, 6 नवंबर को समाप्त हो गई। अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए लाइसेंसधारी दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए, लेकिन कई बाजारों में बिना लाइसेंस के पटाखे बेचने का सिलसिला देर रात तक जारी रहने की खबर सामने आई है। खासकर जामा मस्जिद के पास पाईवालान इलाके में आधी रात तक खरीदारों की भीड़ देखी गई। इससे पटाखों की बिक्री पर लागू नियमों और उनकी निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली के अवसर पर दिल्ली-एनसीआर में प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए 4 से 6 नवंबर तक सीमित अनुमति दी थी। अदालत के आदेश के अनुसार, केवल निर्धारित स्थानों पर वैध लाइसेंस रखने वाले कारोबारी ही स्वीकृत ग्रीन पटाखे बेच सकते थे। इस दौरान पटाखों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और पहचान से जुड़े नियमों का पालन करना भी अनिवार्य था। शुक्रवार को बिक्री का अंतिम दिन होने के कारण दिल्ली के विभिन्न पटाखा बाजारों में खरीदारों की भीड़ रही। लोग दीपावली के लिए पटाखे खरीदने पहुंचे। जामा मस्जिद के नजदीक पाईवालान बाजार में दिनभर चहल-पहल बनी रही। शाम होते-होते कई अधिकृत दुकानदारों ने निर्धारित समयसीमा के अनुसार अपनी दुकानें बंद करनी शुरू कर दीं।
हालांकि, बाजार में स्थिति अलग दिखाई दी। रिपोर्ट के मुताबिक, पाईवालान इलाके में 50 से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेता बिना लाइसेंस के पटाखे बेचते नजर आए। इन विक्रेताओं के पास खरीदारों की भीड़ बनी रही और बिक्री देर रात तक चलती रही। रिपोर्ट में मौके पर अवैध विक्रेताओं को रोकने के लिए पर्याप्त प्रशासनिक निगरानी नहीं दिखाई देने की बात भी कही गई है। पाईवालान के अलावा सदर बाजार, भागीरथ पैलेस, चांदनी चौक और करोलबाग जैसे व्यस्त बाजारों में भी अनधिकृत पटाखा बिक्री की शिकायतें सामने आई हैं। इन स्थानों पर बिना अनुमति पटाखे बेचे जाने से वैध कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है।
लाइसेंसधारी दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अदालत के आदेश और प्रशासन की शर्तों का पालन किया। निर्धारित अवधि समाप्त होते ही बिक्री रोक दी गई, लेकिन बिना लाइसेंस वाले विक्रेता कारोबार करते रहे। दुकानदारों ने सवाल उठाया कि नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों पर सख्ती और अवैध विक्रेताओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से असमान स्थिति पैदा हो रही है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता पटाखों की गुणवत्ता और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति दी थी। लेकिन बिना लाइसेंस वाली दुकानों पर बिकने वाले पटाखों की जांच नहीं होने से यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वे निर्धारित मानकों के अनुरूप थे या प्रतिबंधित श्रेणी के।
अदालत ने निर्देश दिया था कि ग्रीन पटाखों के पैकेट पूरी तरह सीलबंद होने चाहिए और उन पर उत्पाद से संबंधित क्यूआर कोड होना अनिवार्य है। इसके अलावा बेरियम युक्त पटाखों और पटाखों की लड़ियों की बिक्री तथा इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। इन नियमों का उद्देश्य प्रदूषण को सीमित करना और अनधिकृत पटाखों की बिक्री रोकना है। दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए पटाखों पर प्रतिबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष दीपावली पर सीमित छूट देते हुए बिक्री और इस्तेमाल के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया।
अदालत के आदेश के अनुसार, 7 और 8 नवंबर को ग्रीन पटाखे केवल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच फोड़े जा सकते हैं। अस्पतालों, नर्सिंग होम, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं है। 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध दोबारा लागू हो जाएगा। इधर, अवैध बिक्री की खबरों ने निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। यदि निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी पटाखों की बिक्री जारी रहती है, तो अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। फिलहाल वैध कारोबारियों ने नियमों के पालन में समानता और अवैध बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता जताई है। वहीं, दीपावली के दौरान पटाखों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन कराना भी संबंधित अधिकारियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
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