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दिल्ली में CJP प्रदर्शन को वकीलों का समर्थन, सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर तक निकाला मार्च

Kavita2
10 Oct 2026 12:05 PM IST
दिल्ली में CJP प्रदर्शन को वकीलों का समर्थन, सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर तक निकाला मार्च
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में सुप्रीम कोर्ट के वकील भी शामिल हो गए हैं। शनिवार को वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर की ओर मार्च निकाला। हालांकि, प्रदर्शनकारी वकीलों को पुलिस ने रास्ते में ही हिरासत में ले लिया। यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर किया जा रहा है। छात्र और युवा संगठनों की ओर से चलाए जा रहे व्यापक आंदोलन के बीच वकीलों की भागीदारी ने इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा बढ़ा दी है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के बीच वकीलों का मार्च महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें। वहीं, पुलिस की ओर से मार्च में शामिल लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं।

सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर की ओर निकले वकील

शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए मार्च निकाला। यह मार्च सुप्रीम कोर्ट से शुरू होकर जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहा था।

प्रदर्शनकारी वकील चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे थे।

उनका विरोध मुख्य रूप से SIR में कथित अनियमितताओं से संबंधित था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हालांकि, मार्च में कितने वकील शामिल हुए और उन्होंने किन विशिष्ट अनियमितताओं का आरोप लगाया, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

मार्च के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने रास्ते में ही लिया हिरासत में

सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे वकीलों को पुलिस ने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया।

इस कार्रवाई के बाद मार्च आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि, हिरासत में लिए गए वकीलों की कुल संख्या और उन्हें किस स्थान पर ले जाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने किस कानूनी प्रावधान के तहत हिरासत की कार्रवाई की।

दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शन और मार्च के दौरान पुलिस को कानून-व्यवस्था तथा सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाएं बनाए रखनी होती हैं। वहीं, नागरिकों को निर्धारित संवैधानिक सीमाओं के भीतर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार भी प्राप्त है।

इस मामले में हिरासत की कार्रवाई के कारणों को लेकर पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उठाई जा रही है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ पहलुओं पर गंभीर सवाल हैं और निर्वाचन आयोग को इनका जवाब देना चाहिए।

हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र जांच या किसी न्यायिक निर्णय से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

मुख्य चुनाव आयुक्त एक संवैधानिक पद पर नियुक्त अधिकारी होते हैं। उनके पद से हटने या हटाए जाने की प्रक्रिया निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत आती है।

ऐसे में इस्तीफे की मांग एक राजनीतिक और सार्वजनिक विरोध का विषय है, जबकि किसी पदाधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी तय करने के लिए अलग प्रक्रिया होती है।

SIR प्रक्रिया को लेकर बढ़ा विवाद

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था है।

इसका उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा करना और निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना होता है।

हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। इसी आधार पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं और निर्णयों का मूल्यांकन संबंधित नियमों, दस्तावेजों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

किसी विशेष अनियमितता की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण और संबंधित प्राधिकरण की जांच महत्वपूर्ण होती है।

छात्र और युवा संगठनों के आंदोलन का हिस्सा

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का यह मार्च छात्र और युवा संगठनों की ओर से किए जा रहे व्यापक विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बताया गया है।

इन संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

अब वकीलों की भागीदारी से इस विरोध में एक अन्य पेशेवर वर्ग की मौजूदगी भी सामने आई है।

हालांकि, इस मार्च में शामिल सभी वकीलों के नाम और उनकी संगठनात्मक संबद्धता का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।

यह भी स्पष्ट नहीं है कि मार्च किसी औपचारिक वकील संगठन के बैनर तले आयोजित हुआ था या इसमें वकील व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए थे।

इसलिए इसे पूरे कानूनी समुदाय या सभी सुप्रीम कोर्ट वकीलों का सामूहिक रुख नहीं माना जा सकता।

विरोध प्रदर्शन और संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा

दिल्ली में वकीलों को हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच संतुलन का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है।

हालांकि, इन अधिकारों पर सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य निर्धारित आधारों पर उचित कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

किसी विशेष प्रदर्शन को रोकने या प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की वैधता संबंधित परिस्थितियों और लागू कानूनों के आधार पर तय होती है।

इस मामले में पुलिस की ओर से जारी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण हिरासत की कार्रवाई के कानूनी आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर बढ़ी हलचल

CJP और अन्य छात्र-युवा संगठनों की ओर से किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के बीच वकीलों का मार्च एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप इस आंदोलन के प्रमुख मुद्दे हैं।

वहीं, पुलिस की ओर से मार्च में शामिल वकीलों को हिरासत में लिए जाने के बाद अब आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के संबंध में पुलिस क्या निर्णय लेती है और आंदोलन से जुड़े संगठन अपनी अगली गतिविधियों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

फिलहाल, शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर की ओर मार्च कर रहे वकीलों को दिल्ली पुलिस ने रास्ते में हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जता रहे थे। यह मार्च छात्र और युवा संगठनों के व्यापक आंदोलन का हिस्सा बताया गया है।

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