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दिल्ली जिला अदालतों के वकीलों ने किया न्यायिक कामकाज का बहिष्कार

Ratna Netam
21 Sept 2026 5:23 PM IST
दिल्ली जिला अदालतों के वकीलों ने किया न्यायिक कामकाज का बहिष्कार
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नई दिल्ली। दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने सोमवार को न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। वकीलों ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के नियम 167 में किए गए बदलावों का विरोध किया। उनका कहना है कि ट्रैफिक चालान के निपटारे की प्रक्रिया में बदलाव से न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारों और भूमिका पर असर पड़ सकता है।दिल्ली की सभी जिला अदालत बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले वकीलों ने यह विरोध किया। इस दौरान उन्होंने अदालतों में नियमित सुनवाई से दूरी बनाए रखी और संशोधित नियम के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
नियम 167 में बदलाव का विरोध
वकीलों का मुख्य विरोध सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के नियम 167 में किए गए बदलाव को लेकर है। इस नियम के तहत विवादित ट्रैफिक चालान के निपटारे की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।वकीलों का कहना है कि पहले चालान से जुड़े विवादों का निपटारा न्यायिक मजिस्ट्रेटों के माध्यम से होता था, लेकिन अब इसमें सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को भूमिका देने का प्रस्ताव है।बार एसोसिएशन का कहना है कि चालान विवादों के निपटारे में न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई का महत्व बना रहना चाहिए।
कोऑर्डिनेशन कमेटी ने जारी किया था सर्कुलर
दिल्ली की जिला अदालत बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमेटी ने 20 सितंबर को एक सर्कुलर जारी कर इस मुद्दे पर विरोध जताया था।सर्कुलर में कहा गया था कि संशोधित नियम 167 के तहत चालान का सामना करने वाले व्यक्ति के पास दो विकल्प होंगे। वह या तो चालान की राशि स्वीकार कर उसका भुगतान कर सकता है या फिर चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी के सामने दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ उसे चुनौती दे सकता है।
वकीलों ने उठाए प्रक्रिया से जुड़े सवाल
वकीलों का कहना है कि ट्रैफिक चालान जैसे मामलों में विवादों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उनका तर्क है कि प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसी जिम्मेदारी देने से न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।उन्होंने मांग की कि चालान विवादों के समाधान की प्रक्रिया में न्यायिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
अदालतों के कामकाज पर पड़ा असर
वकीलों के न्यायिक कामकाज से दूर रहने के कारण सोमवार को जिला अदालतों में कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई। हालांकि जरूरी मामलों और आपात स्थितियों को लेकर अदालतों में अलग व्यवस्था हो सकती है।बार एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से विरोध में शामिल होने की अपील की थी और नियम में बदलाव के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
संशोधित व्यवस्था में क्या है प्रावधान
नए नियम के अनुसार, चालान जारी होने के बाद वाहन मालिक या संबंधित व्यक्ति को चालान स्वीकार करने या उसे चुनौती देने का विकल्प दिया गया है।यदि कोई व्यक्ति चालान को चुनौती देना चाहता है तो उसे निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित अधिकारी के सामने दस्तावेजों के साथ अपनी बात रखनी होगी।इस प्रक्रिया का उद्देश्य ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों का तेजी से निपटारा करना बताया जा रहा है, लेकिन वकीलों ने इसके अधिकार क्षेत्र और प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई है।
आगे की रणनीति पर नजर
दिल्ली जिला अदालतों के वकीलों के विरोध के बाद अब इस मामले में आगे की गतिविधियों पर नजर बनी हुई है। बार एसोसिएशन और संबंधित अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है।ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के निपटारे की व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल और तेज करना बताया जा रहा है, लेकिन वकील समुदाय इसे न्यायिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मानकर विरोध कर रहा है।फिलहाल दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों का यह विरोध संशोधित नियम 167 के खिलाफ है। अब देखना होगा कि सरकार और बार एसोसिएशन के बीच इस मुद्दे पर आगे क्या सहमति बनती है।
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