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Highway पर ट्रॉमा सेंटर की कमी: सड़क हादसों में बढ़ती मौतों की चिंता

New Delhi.नई दिल्ली: इस चिंताजनक तथ्य से सभी सरकारें अनभिज्ञ नहीं होंगी कि देश में हर साल सड़क हादसों में घायल होने वाले 30-40 फीसदी यात्री सिर्फ समय पर इलाज न मिलने की वजह से मर जाते हैं। इसके बावजूद हालात देखिए कि तमिलनाडु को छोड़कर लगभग सभी राज्य आंखें मूंदे बैठे हैं और हाईवे के पास ट्रॉमा सेंटर बनाने में किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई है। सरकारों को हाईवे के किनारे ट्रॉमा सेंटर बनाने का आदेश उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा ने हाईवे के किनारे एक भी लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर नहीं बनाया है। हाईवे के किनारे ट्रॉमा केयर सेंटर बनाने का कोई लिखित नियम या आदेश नहीं है,
लेकिन विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सरकारों को हाईवे के किनारे ट्रॉमा सेंटर बनाने चाहिए, ताकि घायलों को समय पर उचित इलाज मिल सके और सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम किया जा सके। गडकरी ने सड़क हादसों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताईसड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में सड़क हादसों का लिखित आंकड़ा 2022 का ही है। उसके अनुसार, देशभर में 4,61,312 सड़क दुर्घटनाएं हुईं और इनमें 168491 यात्रियों की मौत हुई। खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माना है कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और वर्तमान में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या करीब एक लाख 70 हजार तक पहुंच गई है।





