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कुमारस्वामी की शिवकुमार को चुनौती, बोले- स्टिंग ऑपरेशन की साजिश सच है तो जांच कराएं

Kavita2
9 Oct 2026 10:48 AM IST
कुमारस्वामी की शिवकुमार को चुनौती, बोले- स्टिंग ऑपरेशन की साजिश सच है तो जांच कराएं
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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को चुनौती दी है कि यदि उन्हें स्टिंग ऑपरेशन के जरिए फंसाने की कोशिश की गई थी, तो इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए। कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री खुद साजिश की बात कह चुके हैं और उनके पास तस्वीरों समेत सबूत होने का दावा किया गया है, तो आरोपियों की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है।

गुरुवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कुमारस्वामी ने कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें फंसाने की कोशिश की थी और इस संबंध में पुलिस को भी जानकारी थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद इस मामले में तस्वीरों सहित कई सबूत मौजूद होने की बात कही थी। ऐसे में अब यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कथित स्टिंग ऑपरेशन के पीछे कौन लोग थे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

केंद्रीय मंत्री ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि वास्तव में उनके खिलाफ साजिश रची गई थी, तो इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आरोपियों की जानकारी सामने लाने में हिचकिचाहट क्यों हो रही है।

स्टिंग ऑपरेशन के आरोपों पर जांच की मांग

एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि यदि स्टिंग ऑपरेशन के जरिए किसी व्यक्ति को गलत तरीके से फंसाने की कोशिश हुई है, तो यह मामूली मामला नहीं है। ऐसे आरोपों की जांच कर सच्चाई सामने लाना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से कहा कि यदि उनके दावों में तथ्य हैं, तो उन्हें जांच के आदेश देने चाहिए।

कुमारस्वामी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने पहले ही कहा था कि कुछ लोग उन्हें फंसाने के इरादे से आए थे और पुलिस को भी इसकी जानकारी थी। उन्होंने तस्वीरों सहित अन्य सबूत होने की बात का भी उल्लेख किया। केंद्रीय मंत्री ने इसी आधार पर सवाल किया कि यदि सबूत मौजूद हैं, तो संबंधित लोगों की पहचान क्यों नहीं बताई जा रही है।

उन्होंने कहा कि मामले में जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित स्टिंग ऑपरेशन की योजना किसने बनाई थी, इसमें कौन-कौन शामिल था और इसका उद्देश्य क्या था।

मुख्यमंत्री के बयान को बनाया सवालों का आधार

कुमारस्वामी ने अपने सवालों के समर्थन में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कथित पूर्व बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री खुद उनके खिलाफ साजिश रचे जाने की बात कह रहे हैं, तो मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने पूछा कि कथित साजिश में शामिल लोगों के नाम सार्वजनिक करने में परेशानी क्या है। उनके मुताबिक, यदि पुलिस को पहले से जानकारी थी और तस्वीरों समेत सबूत उपलब्ध थे, तो जांच के जरिए सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कथित स्टिंग ऑपरेशन की तारीख, इसमें शामिल लोगों के नाम और सबूतों की प्रकृति का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस की भूमिका पर भी उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने इस मामले में पुलिस की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कथित बयान के अनुसार, पुलिस को इस बारे में जानकारी थी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि अगर कथित साजिश के बारे में पुलिस को जानकारी थी, तो आगे क्या कदम उठाए गए।

कुमारस्वामी ने मांग की कि मामले की गहन जांच की जाए, ताकि यह पता चल सके कि क्या वास्तव में स्टिंग ऑपरेशन के जरिए उन्हें फंसाने की कोशिश की गई थी। साथ ही, कथित तौर पर शामिल व्यक्तियों की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में इस मामले में जांच के आदेश दिए जाने या आरोपियों की पहचान सार्वजनिक किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की ओर से कुमारस्वामी की इस चुनौती पर विस्तृत प्रतिक्रिया की जानकारी भी सामने नहीं आई है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर जोर

एच.डी. कुमारस्वामी के बयान ने कर्नाटक की राजनीति में स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े आरोपों को फिर चर्चा में ला दिया है। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से सीधे जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ साजिश के सबूत मौजूद हैं, तो उन्हें सामने लाया जाना चाहिए।

कुमारस्वामी का कहना है कि किसी व्यक्ति को फंसाने की कथित कोशिश की जांच होना जरूरी है। उनके मुताबिक, जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में किन लोगों की भूमिका रही।

फिलहाल, केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से इस कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले में जांच के आदेश देने की मांग की है। अब इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों और किसी संभावित जांच के आधार पर स्पष्ट होगी।

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