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मयूर विहार रामलीला में पहुंचे केजरीवाल, किया रावण दहन
Rajeshwari Nishad
20 Oct 2026 9:38 PM IST

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नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के मयूर विहार फेज-तीन में दशहरे का पर्व धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रीहनुमंत रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित दशहरा कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले कलाकारों की आरती उतारी। इसके बाद उन्होंने बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों पर तीर चलाकर उनका दहन किया।
कार्यक्रम में दशहरे की परंपराओं के अनुरूप धार्मिक आयोजन किया गया। अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश प्रमुख रहा।
राम और लक्ष्मण की आरती उतारी
मयूर विहार फेज-तीन में आयोजित श्रीहनुमंत रामलीला कमेटी के दशहरा समारोह में अरविंद केजरीवाल ने सबसे पहले भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकारों की आरती की। भारतीय परंपरा में धार्मिक आयोजनों के दौरान आरती का विशेष महत्व माना जाता है। यह श्रद्धा, सम्मान और भक्ति का प्रतीक है।
रामलीला में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पात्र रामायण की महत्वपूर्ण घटनाओं को जीवंत करते हैं। भगवान श्रीराम को मर्यादा, धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है, जबकि लक्ष्मण त्याग, निष्ठा और भाई के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। दशहरे के अवसर पर इन पात्रों की पूजा और आरती के जरिए उनके आदर्शों को याद किया जाता है।
अरविंद केजरीवाल ने भी कार्यक्रम में इसी परंपरा का निर्वहन किया। इसके बाद दशहरा समारोह के मुख्य आकर्षण रावण दहन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
तीर चलाकर किया रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद का वध
आरती के बाद अरविंद केजरीवाल ने पुतलों पर तीर चलाया। इसके साथ ही बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। दशहरा पर्व पर रावण दहन को असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
रामायण की कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध कर माता सीता को उसके बंधन से मुक्त कराया था। रावण के साथ उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद भी युद्ध में मारे गए थे। इसी प्रसंग को याद करते हुए हर साल दशहरे पर देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।
मयूर विहार फेज-तीन में भी इसी परंपरा के तहत तीनों पुतलों का दहन किया गया। इस आयोजन के जरिए लोगों को बुराइयों से दूर रहने और सत्य, सदाचार तथा धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है दशहरा
दशहरा या विजयादशमी भारत के प्रमुख त्योहारों में शामिल है। यह पर्व हर साल आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। इसलिए दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
देश के अनेक शहरों और कस्बों में दशहरे के अवसर पर रामलीला का मंचन किया जाता है। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, उनके संघर्ष, वनवास, माता सीता के हरण और रावण के साथ हुए युद्ध की कथा प्रस्तुत की जाती है। इन आयोजनों के जरिए नई पीढ़ी को रामायण की कहानियों और उनसे जुड़े नैतिक मूल्यों से परिचित कराया जाता है।
दशहरे पर रावण दहन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर भी माना जाता है। रावण के दस सिर को अक्सर मनुष्य के भीतर मौजूद विभिन्न नकारात्मक प्रवृत्तियों के प्रतीक के रूप में भी समझा जाता है। अहंकार, क्रोध, लालच और अन्य बुराइयों को त्यागकर बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा इस पर्व से जुड़ी है।
रामलीला आयोजनों की है खास भूमिका
दिल्ली में दशहरे के दौरान कई स्थानों पर रामलीला और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे आयोजनों में स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल होकर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा बनते हैं। रामलीला कमेटियां मंचन, धार्मिक अनुष्ठान और पुतला दहन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।
मयूर विहार फेज-तीन में श्रीहनुमंत रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम भी इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा। कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की आरती उतारने के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों पर तीर चलाकर दहन की रस्म पूरी की।
इस तरह दशहरा समारोह में धार्मिक अनुष्ठान और रावण दहन के जरिए पर्व के पारंपरिक महत्व को सामने रखा गया। विजयादशमी का संदेश यही है कि व्यक्ति अपने जीवन में सत्य और सदाचार को अपनाए तथा बुराइयों से दूर रहने का प्रयास करे। मयूर विहार में आयोजित इस कार्यक्रम में भी रावण दहन के माध्यम से अच्छाई की जीत और बुराई के अंत का प्रतीकात्मक संदेश दिया गया।
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