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तीर्थ यात्रा बसों की जांच पर केजरीवाल नाराज, NHRC पर लगाए गंभीर आरोप

Ratna Netam
24 Oct 2026 9:30 PM IST
तीर्थ यात्रा बसों की जांच पर केजरीवाल नाराज, NHRC पर लगाए गंभीर आरोप
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग पंजाब सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के तहत बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए चलाई जा रही सुपर डीलक्स बसों को जानबूझकर निशाना बना रहा है। केजरीवाल ने आयोग की हालिया सुरक्षा जांच पर सवाल उठाते हुए इसे भेदभावपूर्ण बताया। हालांकि, NHRC ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर NHRC की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग केवल पंजाब की तीर्थ यात्रा योजना के तहत संचालित बसों की जांच कर रहा है, जबकि दूसरे राज्यों में चलने वाली बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ऐसी कार्रवाई नहीं की जा रही है।केजरीवाल ने सवाल किया कि यदि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो जांच केवल एक राज्य की बसों तक सीमित क्यों रखी जा रही है? उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार की जनकल्याणकारी योजना को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए चलाई जा रही विशेष बसें
पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना का उद्देश्य बुजुर्ग नागरिकों को धार्मिक स्थलों की यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए विशेष बसों की व्यवस्था की गई है, ताकि वे सुविधाजनक तरीके से धार्मिक यात्राएं कर सकें।सरकार की ओर से संचालित सुपर डीलक्स बसों में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखने का दावा किया जाता है। योजना का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा का अवसर उपलब्ध कराना है, जो आर्थिक या अन्य कारणों से धार्मिक स्थलों की यात्रा नहीं कर पाते।ऐसे में इन बसों की सुरक्षा जांच को लेकर उठे विवाद ने योजना के संचालन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।
NHRC ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक पक्षपात संबंधी आरोपों को खारिज कर दिया है। आयोग ने अपनी कार्रवाई के संदर्भ में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट (CIRT) द्वारा निर्धारित यात्री सुरक्षा मानकों का हवाला दिया है।आयोग का पक्ष है कि यात्री सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन आवश्यक है। बसों में सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण विषय है और इस संबंध में निर्धारित तकनीकी मानकों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।NHRC के इस स्पष्टीकरण के बाद विवाद का केंद्र यह सवाल बन गया है कि सुरक्षा जांच के लिए बसों का चयन किस आधार पर किया गया और क्या इसी तरह के मानक अन्य परिवहन सेवाओं पर भी लागू किए जा रहे हैं।
यात्री सुरक्षा और राजनीतिक आरोपों पर बहस
इस मामले में एक ओर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक जांच के चयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आयोग इसे यात्री सुरक्षा मानकों से जुड़ा विषय बता रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन में इस्तेमाल होने वाली बसों की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा उपकरण, रखरखाव और निर्धारित मानकों का पालन यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होता है। विशेष रूप से बुजुर्ग यात्रियों को लेकर संचालित सेवाओं में सुरक्षा व्यवस्था का महत्व और बढ़ जाता है।हालांकि, केवल सुरक्षा जांच किए जाने से किसी बस में तकनीकी खामी होने की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए जांच के निष्कर्ष और संबंधित तकनीकी रिपोर्ट का सामने आना जरूरी है।
जांच के तरीके को लेकर उठे सवाल
अरविंद केजरीवाल के आरोपों के बाद यह मामला केवल परिवहन सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जांच की निष्पक्षता को लेकर भी बहस शुरू हो गई है।AAP का आरोप है कि पंजाब सरकार की योजना को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि NHRC ने इससे इनकार किया है।अब इस विवाद में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच से संबंधित विस्तृत तथ्य और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जानकारी क्या सामने आती है। फिलहाल, केजरीवाल के आरोप और आयोग के स्पष्टीकरण ने पंजाब की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।
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