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KC Venugopal ने पीएम मोदी पर विधानसभा के अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया

Anurag
21 April 2026 5:53 PM IST
KC Venugopal ने पीएम मोदी पर विधानसभा के अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया
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New Delhi नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पार्लियामेंट्री अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। इस संदर्भ में उन्होंने पार्लियामेंट को प्रिविलेज नोटिस दिया है। वेणुगोपाल का यह आरोप प्रधानमंत्री के 18 अप्रैल के टीवी संबोधन पर आधारित है, जिसमें मोदी ने विपक्ष पर आरोप लगाया था कि विपक्ष के कारण 131वां कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट बिल हार गया और इसी वजह से महिला रिजर्वेशन बिल को मंजूरी नहीं मिल सकी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष को दोषी ठहराते हुए कहा था कि विपक्ष ने इस बिल के पारित होने में रुकावट डाली और महिला आरक्षण बिल की राह में अड़चन पैदा की। हालांकि, कांग्रेस के लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का विपक्ष पर आरोप लगाना अनैतिक था और यह सत्ता का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कहना कि बिल की हार का कारण विपक्ष था, पार्लियामेंट्री अधिकारों का उल्लंघन है।

वेणुगोपाल ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि पार्लियामेंट में बहुमत हासिल न करने का कारण विपक्ष है।" उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत रिजर्वेशन की मांग कर रहा था, लेकिन उन्होंने सिर्फ सरकार द्वारा लाए गए डिलिमिटेशन बिल का विरोध किया था। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष ने 2023 के महिला आरक्षण बिल को लागू करने की मांग की है, और इसे 106वें संविधान संशोधन के तहत लागू किया जाए।

कांग्रेस नेता ने इस मामले में प्रधानमंत्री के बयान को पूरी तरह से असंवैधानिक और अनुचित करार दिया। वेणुगोपाल ने कहा, "सरकार का यह कहना कि बिल की हार का कारण विपक्ष था, संविधान का उल्लंघन है। संविधान के आर्टिकल 105 के अनुसार, वोटिंग में भाग लेने वाले सदस्यों को किसी भी कारण से दोषी ठहराया नहीं जा सकता है। यह आर्टिकल प्रधानमंत्री सहित सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों पर लागू होता है।"

उन्होंने कहा कि जब कोई चुना हुआ प्रतिनिधि अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है, तो उन्हें इस तरह से दोषी ठहराना एक निजी हमला होगा। वेणुगोपाल ने इसे संसदीय प्रणाली की अवमानना और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री का यह बयान न केवल उनकी पार्टी बल्कि देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को कमजोर करता है।

प्रिविलेज नोटिस में वेणुगोपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के आरोपों से संसदीय प्रक्रियाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका यह कदम पार्लियामेंट में विपक्ष की आवाज़ को दबाने का प्रयास बताया गया है।

इसके अलावा, कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि उनका पार्टी हमेशा से महिलाओं के आरक्षण की समर्थक रही है, और उनका उद्देश्य हमेशा से समाज के हर तबके को समान अवसर प्रदान करना रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विपक्ष का विरोध किसी पार्टी विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के हक में है।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों के लिए यह मुद्दा केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह संविधान और संसदीय अधिकारों की रक्षा करने की एक ज़रूरत बन चुका है। कांग्रेस के इस प्रिविलेज नोटिस से यह भी दिखता है कि विपक्ष सरकार की नीतियों और उसके कार्यकलापों के खिलाफ मुखर हो गया है, और अब वे इसे संसद के भीतर ही चुनौती देने का रास्ता अपना रहे हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला केवल एक बयानी विवाद नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया, संसदीय मर्यादा और महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहरी बहस की ओर इशारा करता है।

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