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खुद को कॉकरोच कहते हैं तो बुरा क्यों लगा कंगना का सवाल

Ratna Netam
12 Aug 2026 8:57 PM IST
खुद को कॉकरोच कहते हैं तो बुरा क्यों लगा कंगना का सवाल
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नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान युवाओं को लेकर दिए गए अपने विवादित बयान के बाद भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक बार फिर सफाई दी है। कंगना ने कहा कि उनकी टिप्पणी सभी युवाओं या पूरी युवा पीढ़ी के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के संदर्भ में थी जो खुद को ‘कॉकरोच’ बताते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को कॉकरोच कहता है तो कॉकरोच के गटर से निकलने की बात कहने में क्या गलत है। इस दौरान कंगना ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी तीखा हमला बोला और संसद में उनके रवैये को लेकर सवाल उठाए।
कंगना रनौत ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पूरी युवा पीढ़ी से जोड़ दिया गया। उन्होंने कहा, "जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं और हम कहते हैं कि कॉकरोच गटर से निकलते हैं, इसमें गलत क्या है?" कंगना के मुताबिक, उनका आशय केवल इतना था कि जब कोई समूह स्वयं के लिए कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल करता है तो उससे जुड़े संदर्भ में कही गई बात को सभी युवाओं के लिए टिप्पणी नहीं माना जाना चाहिए।
कंगना ने कहा कि वह खुद को कॉकरोच नहीं मानतीं और यदि कोई उनसे कहे कि वह गटर में रहती हैं तो वह इसका विरोध करेंगी। लेकिन जो व्यक्ति खुद को कॉकरोच बताता है, उसके संदर्भ में गटर का उल्लेख करने को पूरी युवा पीढ़ी का अपमान बताना सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने देश के सभी युवाओं को ‘गटर जेनरेशन’ नहीं कहा था।
यह विवाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दौरान सामने आया था। आंदोलन में शामिल कुछ युवाओं द्वारा कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर कंगना ने प्रतिक्रिया दी थी। इसी दौरान उनके ‘गटर जेनरेशन’ वाले बयान ने राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। उनके बयान की आलोचना हुई और इसे युवाओं के अपमान से जोड़कर देखा गया। अब कंगना का कहना है कि उनकी टिप्पणी को उसके मूल संदर्भ से अलग करके पेश किया गया।
कंगना रनौत ने युवाओं में नशे और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं का कोई हिस्सा ड्रग्स, बेटिंग, गैंबलिंग या डार्क वेब से जुड़ी लत की चपेट में है और उस हिस्से की आलोचना की जाती है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि देश के सभी युवाओं के बारे में वैसी ही राय रखी जा रही है। उनके मुताबिक, किसी खास वर्ग या कुछ लोगों की गतिविधियों पर टिप्पणी को पूरी पीढ़ी पर लागू करना उचित नहीं है।
भाजपा सांसद ने छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों की मांगों और तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगने के तरीके को लेकर कहा कि यह उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है कि गृह मंत्री संसद परिसर में आकर व्यक्तिगत रूप से एक-एक व्यक्ति को जवाब देंगे। इसी क्रम में उन्होंने आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों की समझ पर भी तीखी टिप्पणी की।
कंगना रनौत ने इसके बाद राहुल गांधी को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद और देश की गंभीरता को समझने के बजाय उसका मजाक बना रहे हैं। कंगना ने कहा कि एक तरफ विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगता है और दूसरी तरफ यह कहता है कि वह उनका भाषण या बात सुनने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने इसे विरोधाभासी रवैया बताते हुए राहुल गांधी की संसदीय भूमिका पर सवाल उठाए।
कंगना ने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थाओं में से एक है और वहां सत्ता पक्ष तथा विपक्ष दोनों को मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जिस तरह से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, उससे संसद की गरिमा प्रभावित हो रही है। कंगना ने यहां तक दावा किया कि विपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी के मौजूदा रवैये को देखते हुए उन्हें लगता है कि यह उनका आखिरी कार्यकाल हो सकता है।
कंगना रनौत की ताजा सफाई के बाद ‘गटर जेनरेशन’ विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। जहां कंगना का कहना है कि उनकी टिप्पणी केवल एक विशेष समूह और उसके व्यवहार को लेकर थी, वहीं उनके आलोचक इसे युवाओं के लिए अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से जोड़ रहे हैं। ऐसे में छात्र आंदोलन को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में पहुंच गया है।
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