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दिल्ली-एनसीआर
राज्यसभा में कमल हासन का भाषण, मतदाता सूची, लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर की बात
SHIDDHANT
4 Feb 2026 8:27 PM IST

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Delhi दिल्ली। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और तमिलनाडु से राज्यसभा सांसद कमल हासन ने संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में बुधवार को अपने पहले भाषण में लोकतंत्र, भाषा, संस्कृति और मतदाता अधिकारों को लेकर बात की।
उन्होंने अपने भाषण को भावनात्मक, वैचारिक और वैधानिक स्तरों पर पेश किया। उन्होंने कहा कि संसद के इस सदन में अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों की आवाज सुनाई देती है। उनकी खुद की शुरुआत सिनेमा के माध्यम से हुई है। उन्होंने खुद को “परमकुड़ी का एक बच्चा” बताया, जिसे सिनेमा ने पहचान दी और वहीं से उन्हें तमिल भाषा, इतिहास और सामाजिक चेतना से परिचय मिला। कमल हासन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोल रहे थे।
अपने भाषण में कमल हासन ने मतदाता सूची को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के नाम गलत वर्तनी या तकनीकी त्रुटियों के कारण हटाए जा रहे हैं, जिससे लाखों लोग कागजों में मृत हो रहे हैं। उन्होंने इसे लिविंग डेड की संज्ञा देते हुए कहा कि बिहार में यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। बंगाल में भी इस पर कानूनी लड़ाई चल रही है। वहीं, तमिलनाडु में भी लाखों मतदाताओं के प्रभावित होने का खतरा है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वोट डालना सबसे बुनियादी अधिकार है और उसे वर्तनी या तकनीकी भूलों के कारण छीनना अस्वीकार्य है। कमल हासन ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी सत्ता स्थायी नहीं होती और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लोगों के ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारें अमर नहीं होतीं। आने वाली पीढ़ियां, विशेषकर जेन-जी, सब देख रहे हैं। उन्होंने मतदाता सूची मामले में सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति या सरकार पर हमला नहीं, बल्कि विचारों की टकराहट है।
कमल हासन ने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उन्हें जल्दी ही यह एहसास हुआ कि जमीनी हकीकत कई बार संविधान के उस वादे से मेल नहीं खाती, जिसमें भारत को राज्यों का संघ कहा गया है।
उन्होंने द्रविड़ आंदोलन के नेता सीएन अन्नादुरई (अन्ना) को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भाषा, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करना सिखाया। कमल हासन ने कहा कि वर्ष 1969 में अन्नादुरई ने उन्हें अपनी विचारधारा के बौद्धिक उत्तराधिकारियों में से एक बताया था।
उन्होंने कहा कि आज इस सदन में खड़े होकर बोलते हुए वे भावनाओं से कांप रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे मंच के भय से नहीं, बल्कि स्मृतियों और विचारों के बोझ से कांप रहे हैं।
उन्होंने महात्मा गांधी, पेरियार और अन्नादुरई को अपने वैचारिक स्तंभ बताया और कहा कि वे गुस्से के बिना तर्क के साथ बोलना चाहते हैं।
कमल हासन ने इस अवसर के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का सम्मानजनक क्षण है। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और अपने सहयोगी दलों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन्हें राज्यसभा भेजा। कमल हासन ने अपने भाषण का समापन तमिल भाषा में किया।
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