- Home
- /
- दिल्ली-एनसीआर
- /
- JPC ने बताया प्लान,...

Delhi दिल्ली: देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की प्रस्तावित योजना ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) के चेयरमैन पी.पी. चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि इस चुनाव सुधार को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की संभावना पर काम किया जा रहा है।
गोवा में JPC की दो दिवसीय बैठक के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए पी.पी. चौधरी ने कहा कि समिति इस दिशा में एक ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने पर काम कर रही है, जिससे देश में एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था को लागू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित चुनाव सुधारों को लेकर देशभर के अलग-अलग क्षेत्रों के हितधारकों से बातचीत की जा रही है, ताकि इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाई जा सके।
2029 से लागू करने की दिशा में तैयारी
JPC चेयरमैन ने बताया कि समिति का लक्ष्य इस सुधार को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना है। इसके लिए संवैधानिक, प्रशासनिक और चुनावी व्यवस्थाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने के लिए कई स्तरों पर बदलाव की आवश्यकता होगी। इनमें चुनाव प्रक्रिया, राज्यों की विधानसभा अवधि, प्रशासनिक तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अलग-अलग वर्गों से ली जा रही राय
पी.पी. चौधरी ने कहा कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर देशभर में अलग-अलग वर्गों के लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक जिन सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों से चर्चा की गई है, उनमें से करीब 99 प्रतिशत लोगों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य केवल एक प्रस्ताव तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसे सभी पक्षों की सहमति और सहयोग के साथ लागू किया जा सके।
गोवा के मुख्यमंत्री से हुई चर्चा
शुक्रवार को JPC ने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ बैठक की। इस बैठक में एक साथ चुनाव कराने के दौरान आने वाली संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा की गई।
बैठक में राज्य सरकार के अनुभवों और चुनाव प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। समिति ने राज्यों के प्रतिनिधियों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट को और मजबूत करने की प्रक्रिया जारी रखी है।
एक साथ चुनाव कराने के पीछे तर्क
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के समर्थकों का कहना है कि देश में बार-बार चुनाव होने से सरकारी खर्च बढ़ता है और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है। उनका तर्क है कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं तो समय और संसाधनों की बचत हो सकती है।
इसके अलावा, बार-बार होने वाले चुनावों के कारण लागू होने वाली आचार संहिता से विकास कार्यों पर असर पड़ने की बात भी कही जाती है।
विपक्ष और विशेषज्ञों की अलग राय
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय रही है। कुछ दलों का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने से राज्यों के मुद्दे राष्ट्रीय मुद्दों के पीछे दब सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों ने इसके लिए संवैधानिक संशोधन, राज्यों की विधानसभा अवधि में बदलाव और चुनाव आयोग की तैयारियों जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया है।
JPC कर रही है व्यापक अध्ययन
जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी इस मुद्दे पर लगातार बैठकें कर रही है और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों से राय ले रही है।
समिति का प्रयास है कि सभी पक्षों के सुझावों को शामिल करते हुए एक ऐसी रिपोर्ट तैयार की जाए, जिससे भविष्य में चुनाव सुधारों को लागू करने में आसानी हो।
आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल JPC अपनी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है। समिति की बैठकों और विभिन्न राज्यों के दौरे के जरिए चुनाव सुधार से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
पी.पी. चौधरी के बयान के बाद यह साफ संकेत मिला है कि केंद्र सरकार और समिति 2029 के लोकसभा चुनाव को एक साथ चुनाव व्यवस्था लागू करने के संभावित समय के रूप में देख रही है।
अब सभी की नजरें JPC की अंतिम रिपोर्ट और इस दिशा में आगे होने वाली राजनीतिक व संवैधानिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।





