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UP चुनाव से पहले JDU का बड़ा प्लान, निशांत कुमार ने बताई आगे की रणनीति
Ratna Netam
31 Oct 2026 6:16 PM IST

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नई दिल्ली/पटना। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के साथ अब बिहार की सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और जदयू नेता निशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश में पार्टी के संगठन को मजबूत करने और उसका विस्तार करने की योजना का खुलासा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जदयू की कोशिश उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक मौजूदगी को मजबूत करने की है। पार्टी चाहती है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के बैनर तले चुनावी मैदान में उतरे।निशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश में आयोजित होने वाले पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होने से पहले अपनी राजनीतिक योजनाओं को लेकर बात रखी। उन्होंने कहा कि वह उत्तर प्रदेश जा रहे हैं और उनकी कोशिश है कि वहां जदयू का संगठन मजबूत हो। उन्होंने गठबंधन को लेकर भी अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ना चाहती है। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले जदयू की राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
वाराणसी के कार्यक्रम से चुनावी तैयारियों का आगाज
जदयू की ओर से 1 नवंबर को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लोहता में राज्यस्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में निशांत कुमार मुख्य रूप से शामिल होंगे और कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार भी इस कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हैं।इस सम्मेलन को उत्तर प्रदेश में जदयू के संगठन विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पार्टी इस आयोजन के माध्यम से कार्यकर्ताओं को एकजुट करने, संगठन की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और आगामी चुनाव के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश करेगी। खासतौर पर पूर्वांचल के क्षेत्रों में पार्टी अपनी सक्रियता बढ़ाना चाहती है।वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने के पीछे जदयू की रणनीति संगठन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की मानी जा रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़े और संगठन को मजबूत आधार मिल सके।
NDA के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी
निशांत कुमार के बयान का सबसे अहम पहलू उत्तर प्रदेश में एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा है। जदयू बिहार में एनडीए की प्रमुख सहयोगी पार्टी है और अब उत्तर प्रदेश में भी इसी राजनीतिक गठबंधन के तहत अपनी भूमिका तलाश रही है। पार्टी की कोशिश है कि आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन के भीतर उसे उचित राजनीतिक स्थान मिले।हालांकि, उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे और जदयू को कितनी सीटें मिलेंगी, इस संबंध में फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। न ही पार्टी ने अपने संभावित उम्मीदवारों की सूची जारी की है। ऐसे में अभी उसका मुख्य ध्यान संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक गतिविधियों का विस्तार करने पर है।उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबले की स्थिति रही है। ऐसे में जदयू के लिए अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करना एक बड़ी चुनौती होगी। पार्टी को न केवल नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना होगा, बल्कि प्रदेश में पहले से मौजूद राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी उपयोगिता भी साबित करनी होगी।
बिहार के चुनावी अनुभव का यूपी में इस्तेमाल
जदयू के लिए बिहार का राजनीतिक अनुभव उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार के दौरान महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। पार्टी बिहार में लंबे समय से सक्रिय है और वहां उसका मजबूत राजनीतिक आधार रहा है। ऐसे में जदयू नेतृत्व उत्तर प्रदेश में भी अपने संगठन को विस्तार देने के लिए कार्यकर्ताओं और नेताओं के नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है।निशांत कुमार की सक्रियता को भी पार्टी की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। वाराणसी में आयोजित होने वाला कार्यकर्ता सम्मेलन इस लिहाज से अहम है कि इसके जरिए पार्टी प्रदेश में अपनी राजनीतिक उपस्थिति का संदेश देना चाहती है।जदयू के सामने सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचा तैयार करना होगा। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति, जिला इकाइयों को सक्रिय करना और स्थानीय मुद्दों पर जनता के बीच पहुंच बनाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। हालांकि, पार्टी की ओर से इन बिंदुओं पर विस्तृत चुनावी रोडमैप अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
विधान परिषद चुनाव में हार के बाद संगठन सुधार पर जोर
इधर, बिहार विधान परिषद चुनाव में जदयू को चार सीटों में से तीन पर हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी को केवल पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत मिली, जहां जदयू के उम्मीदवार नीरज कुमार ने सफलता हासिल की। वहीं तिरहुत स्नातक, सारण शिक्षक और दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी को हार झेलनी पड़ी।इन नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए निशांत कुमार ने हार स्वीकार की और कहा कि चुनाव परिणामों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने माना कि चुनाव में कुछ कमियां रह गई थीं, जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उनके मुताबिक, पार्टी संगठन में जहां भी कमी है, उसे पूरा करने की जरूरत है।विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बीच उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार की घोषणा को जदयू के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी एक तरफ बिहार में अपने संगठन की कमियों को दूर करने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
2027 में जदयू के सामने होगी बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में जदयू की भूमिका कितनी प्रभावी होगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल पार्टी का जोर कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और संगठन को मजबूत बनाने पर है। वाराणसी का सम्मेलन इस दिशा में शुरुआती महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।निशांत कुमार के बयान से यह संकेत जरूर मिला है कि जदयू उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहती है। हालांकि, पार्टी को चुनाव में कितनी सीटें मिलेंगी और एनडीए के भीतर उसकी क्या भूमिका होगी, इसका फैसला गठबंधन की आगे होने वाली बातचीत से ही सामने आएगा। फिलहाल जदयू ने उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार को अपनी प्राथमिकता बनाकर मिशन 2027 की तैयारियों की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।
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