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JDU नेता के.सी. त्यागी का बयान, संचार साथी ऐप' के प्री-इंस्टॉल फैसले पर बहस खत्म हो जानी चाहिए

SHIDDHANT
3 Dec 2025 11:40 PM IST
JDU नेता के.सी. त्यागी का बयान, संचार साथी ऐप के प्री-इंस्टॉल फैसले पर बहस खत्म हो जानी चाहिए
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Delhi दिल्ली: जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता के.सी. त्यागी ने बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा 'संचार साथी ऐप' के अनिवार्य प्री-इंस्टॉल के फैसले को वापस लेने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। त्यागी ने कहा कि इस फैसले और इसके संबंध में ज्योतिरादित्य सिंधिया के स्पष्ट बयान के बाद अब इस मुद्दे पर बहस खत्म हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "सरकार और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस ऐप का ताक-झांक या टेपिंग से कोई संबंध नहीं है। इसलिए इस विषय पर किसी प्रकार का अटकलें लगाना या विवाद बढ़ाना उचित नहीं है।

के.सी. त्यागी ने आगे कहा कि 'संचार साथी ऐप' का उद्देश्य केवल मोबाइल यूजर्स के लिए सुविधाएं बढ़ाना और डिजिटल सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने कहा कि ऐप के प्री-इंस्टॉल होने को लेकर जो बहस हुई, उसमें अब सस्पेंस खत्म हो गया है। संचार साथी ऐप को लेकर पिछले कुछ दिनों में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक चर्चाएं सामने आई थीं। कुछ विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों ने ऐप की डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद सरकार ने इस फैसले की समीक्षा की और ऐप को अनिवार्य
प्री-इंस्टॉल
से हटाने का निर्णय लिया।

त्यागी ने स्पष्ट किया कि सरकार का डिजिटल इंडिया मिशन और मोबाइल यूजर्स की सुविधा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "इस ऐप का उद्देश्य तकनीकी दृष्टि से नागरिकों को लाभ पहुंचाना है, न कि उनके निजी जीवन या डेटा में हस्तक्षेप करना। उन्होंने आम नागरिकों और मीडिया से भी अपील की कि वे इस मामले में सकारात्मक नजरिए से सोचें और ऐप के वास्तविक उपयोग और फायदे को समझें। उनका मानना है कि तकनीकी सुधारों और डिजिटल सेवाओं में बढ़ोतरी के लिए सरकारी पहल का समर्थन होना चाहिए।

इसके अलावा, त्यागी ने कहा कि विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों को इस मामले में सटीक जानकारी के आधार पर ही टिप्पणी करनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि ऐप के संदर्भ में जो भी विवाद सामने आया, वह केवल गलतफहमी और अधूरी जानकारी के कारण था। के.सी. त्यागी ने अंत में कहा कि सरकार डिजिटल तकनीक और डेटा सुरक्षा के मानकों को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी किसी भी तकनीकी पहल में पारदर्शिता और जनता की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी। इस बयान के बाद माना जा रहा है कि संचार साथी ऐप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस अब धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी, और नागरिकों के लिए इसके लाभों को उजागर करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
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