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नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। निर्वाचन आयोग की ओर से सात राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची से छूटे लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने का अवसर देने के फैसले पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया गया है। रमेश ने कहा कि अब जब कथित गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, तो चुनाव आयोग लगातार अपने आदेशों में बदलाव कर रहा है। उन्होंने इस प्रक्रिया को कथित 'वोट चोरी' से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग दोहराई।शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को चुनाव आयोग ने दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नगालैंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को नए निर्देश जारी किए। इसके तहत उन मतदाताओं को एक और अवसर दिया जाएगा, जिनके नाम एसआईआर के दौरान तैयार मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। आयोग ने विशेष रूप से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाली श्रेणियों यानी ASDD में चिह्नित मतदाताओं के मामलों की समीक्षा करने को कहा है।
चुनाव आयोग के इस फैसले पर जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे आयोग का एक और यू-टर्न बताया। उन्होंने दावा किया कि आयोग का नया आदेश इस बात की देर से की गई स्वीकारोक्ति है कि एसआईआर के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए या सूची में शामिल नहीं किए गए। हालांकि, चुनाव आयोग ने अपने निर्देशों को पात्र मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल होने का अतिरिक्त अवसर देने की व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया है।जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण 13 करोड़ से अधिक भारतीय नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में विरोध और नाराजगी के बाद चुनाव आयोग लगातार सुधारात्मक निर्देश जारी कर रहा है। रमेश के अनुसार, बार-बार आदेशों में बदलाव होने से पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। यह संख्या और मतदाताओं के अधिकार छिनने का दावा कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है; इससे यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि सभी संबंधित व्यक्ति पात्र मतदाता थे या उनके नाम गलत तरीके से हटाए गए।
कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के लगातार बदलते निर्देश सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर कथित वोट चोरी का नया तरीका है और अब गड़बड़ियां सामने आने के बाद संबंधित पक्ष अपने कदमों का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि कथित चोरी पकड़ी जा चुकी है और अब पूरे मामले को संभालने के प्रयास किए जा रहे हैं।रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से जारी हर नया स्पष्टीकरण एक बुनियादी सवाल खड़ा करता है कि देश के नागरिकों को इतनी जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने को कहा गया। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार के नाम पर पात्र नागरिकों के लिए अनावश्यक परेशानियां पैदा नहीं होनी चाहिए।
चुनाव आयोग के नए निर्देशों के अनुसार, संबंधित मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों और शहरी स्थानीय निकाय कार्यालयों में उन मतदाताओं की बूथवार सूची दोबारा प्रदर्शित की जाएगी, जिनके नाम ASDD श्रेणी के अंतर्गत मसौदा सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। इन सूचियों को संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर पढ़ने योग्य पीडीएफ प्रारूप में भी उपलब्ध कराया जाएगा। सूची में नाम शामिल नहीं होने के संभावित कारणों की जानकारी भी दी जाएगी।आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संबंधित मतदाताओं के लिए गणना प्रपत्र दोबारा तैयार किए जाएं। बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ ऐसे मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उन्हें फॉर्म उपलब्ध कराएंगे। जहां संपर्क विवरण उपलब्ध होगा, वहां व्हाट्सऐप, ईमेल और एसएमएस के माध्यम से भी जानकारी भेजी जा सकेगी।
मतदाता चुनाव आयोग की वेबसाइट या ECINET ऐप के माध्यम से अपने पुराने मतदाता पहचान पत्र नंबर का उपयोग करके फॉर्म डाउनलोड कर सकेंगे। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन और पात्रता का सत्यापन होने के बाद नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा। जिन मतदाताओं ने पहले ही फॉर्म-6 जमा कर दिया है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।इस विवाद में फॉर्म-6 का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। इससे पहले चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि एसआईआर के दौरान मसौदा सूची से बाहर हुए मतदाता फॉर्म-6 के माध्यम से दोबारा नाम जुड़वाने का आवेदन कर सकते हैं। कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि पहले से पंजीकृत मतदाता को नए मतदाता की तरह आवेदन करने के लिए कहना उचित नहीं है।जयराम रमेश ने तीन नवंबर को जारी आयोग के स्पष्टीकरण की भी आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता बनने से संबंधित घोषणा और पहले से पंजीकृत नागरिकों के पुनः आवेदन के बीच विरोधाभास है। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया था कि ऐसी परिस्थितियों में आवेदन करने वाले मतदाताओं को गलत घोषणा के आधार पर अभियोजन का सामना नहीं करना पड़ेगा।
इस मामले में न्यायिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने पांच नवंबर को कहा कि केवल पता बदलने वाले पहले से पंजीकृत मतदाताओं को फॉर्म-6 भरने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने ऐसे मामलों में फॉर्म-8 के उपयोग की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना। चुनाव आयोग के ताजा आदेश में भी पहले से पंजीकृत मतदाताओं को गणना प्रक्रिया के माध्यम से नाम बहाल कराने का अतिरिक्त विकल्प दिया गया है।दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। आयोग के अनुसार, मृत व्यक्तियों, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य अपात्र नामों की पहचान के साथ यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि कोई पात्र नागरिक मतदान के अवसर से वंचित न रहे। आयोग ने अधिकारियों को इसके लिए निगरानी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं।कांग्रेस ने फिलहाल अपनी दो प्रमुख मांगें दोहराई हैं। पार्टी चाहती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद छोड़ें और एसआईआर प्रक्रिया को निलंबित किया जाए। हालांकि, इन मांगों पर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।चुनाव आयोग के नए आदेश के बाद एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। जहां कांग्रेस इसे अपनी आपत्तियों की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं आयोग का जोर पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और दोहरी प्रविष्टियों को रोकने पर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए निर्देशों के बाद कितने मतदाता आवेदन करते हैं और सत्यापन के पश्चात कितने नाम अंतिम सूची में शामिल किए जाते हैं।
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