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जनगणना 2027 पर जयराम रमेश का सरकार पर हमला

Kavita2
10 Sept 2026 12:20 PM IST
जनगणना 2027 पर जयराम रमेश का सरकार पर हमला
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नई दिल्ली। कांग्रेस ने जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आगामी जनगणना का स्वरूप “पूरी तरह से बिगड़” गया है और इसके पीछे सरकार का उद्देश्य भी “बहुत संदिग्ध” नजर आता है। पार्टी ने जनगणना में शामिल किए जा रहे कुछ सवालों और जुटाई जाने वाली सूचनाओं को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है।

कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव वाले चार राज्यों में जनगणना 2027 के तहत आबादी की गिनती का काम निर्धारित समय से पहले शुरू करने तथा प्रश्नावली में कई नए सवाल शामिल करने के सरकार के फैसले को लेकर कुछ पूर्व जनगणना अधिकारियों ने चिंता जताई है।

पूर्व अधिकारियों की चिंताओं का मुख्य केंद्र जनगणना के दौरान जुटाए जाने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता और उनकी उपयोगिता है। इसके साथ ही जनगणना, नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) और संभावित नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) के बीच संबंध को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

‘जनगणना 2027 का स्वरूप पूरी तरह बिगड़ा’

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि “जनगणना 2027 का स्वरूप पूरी तरह से बिगड़ गया है।” उन्होंने दावा किया कि जनगणना में शामिल की जा रही कुछ जानकारियां ऐसी हैं, जिनकी जरूरत और उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

कांग्रेस नेता के मुताबिक, जनगणना में मांगी जा रही जानकारी कभी “बेकार”, कभी “गैर-जरूरी” और कभी “खतरनाक” हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से जाति से जुड़े सवाल, वैक्सीनेशन से संबंधित जानकारी और व्यक्ति के माता-पिता के नाम, धर्म तथा जन्म स्थान जैसी सूचनाओं का उल्लेख किया।

रमेश ने कहा कि कुछ जानकारियां ऐसी हैं जिनका डेटा पहले से ही विभिन्न सरकारी व्यवस्थाओं में मौजूद है। ऐसे में उन्हें दोबारा जनगणना के जरिए जुटाने की आवश्यकता पर उन्होंने सवाल उठाया।

चुनावी राज्यों में समय से पहले आबादी की गिनती पर चिंता

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने चुनाव वाले चार राज्यों में जनगणना 2027 के तहत Population Enumeration यानी आबादी की गिनती की प्रक्रिया निर्धारित समय से पहले शुरू करने का फैसला किया है।

पूर्व जनगणना अधिकारियों ने कथित तौर पर इस निर्णय को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों में आबादी की गणना के समय और प्रक्रिया में बदलाव से आंकड़ों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। जनगणना जैसे व्यापक अभ्यास में आंकड़ों का एक समान तरीके से संग्रह किया जाना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

कांग्रेस ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आबादी की गिनती के कार्यक्रम में बदलाव क्यों किया गया और इससे अंतिम आंकड़ों की विश्वसनीयता पर क्या असर पड़ेगा।

प्रश्नावली में नए सवालों को लेकर विवाद

जनगणना 2027 की प्रश्नावली में कई नए सवाल जोड़े जाने की खबरों ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि प्रश्नावली में शामिल हर सवाल की स्पष्ट उपयोगिता होनी चाहिए और ऐसी जानकारी नहीं जुटाई जानी चाहिए, जिसका उद्देश्य स्पष्ट न हो।

जयराम रमेश ने जाति से जुड़े सवाल को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने इसे ऐसी जानकारी की श्रेणी में रखा जिसे कांग्रेस नेता ने “बेकार” बताया। वहीं, वैक्सीनेशन से संबंधित जानकारी को उन्होंने “गैर-जरूरी” करार दिया, क्योंकि उनके मुताबिक इस तरह का डेटा पहले से ही सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध है।

उन्होंने व्यक्ति के माता-पिता के नाम, धर्म और जन्म स्थान जैसी जानकारियों को लेकर भी चिंता जताई। कांग्रेस नेता का कहना है कि ऐसी संवेदनशील जानकारियों को बड़े पैमाने पर एकत्र किए जाने से निजता और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल पैदा हो सकते हैं।

जनगणना, NPR और NRC के संबंध पर सवाल

कांग्रेस की आपत्ति केवल प्रश्नावली तक सीमित नहीं है। पार्टी ने जनगणना 2027, NPR और संभावित NRC के बीच संबंध को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

पूर्व जनगणना अधिकारियों की कथित चिंता के अनुसार, बड़े पैमाने पर जुटाए जाने वाले डेटा का आगे किस तरह इस्तेमाल होगा, इसे लेकर स्पष्टता जरूरी है। कांग्रेस ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि जनगणना के दौरान जुटाई जाने वाली जानकारी का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाएगा और क्या इसे अन्य नागरिक डेटाबेस के साथ जोड़ा जाएगा।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनगणना का उद्देश्य देश की आबादी से संबंधित व्यापक सामाजिक और आर्थिक आंकड़े जुटाना होता है। ऐसे में इसके दायरे में आने वाली अतिरिक्त जानकारी और उसके इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता जरूरी मानी जाती है।

डेटा की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

पूर्व अधिकारियों की चिंताओं में डेटा की गुणवत्ता भी एक प्रमुख मुद्दा बताया गया है। जनगणना देश में सबसे बड़े सांख्यिकीय अभ्यासों में से एक होती है और इसके आंकड़ों का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीतियां बनाने में किया जाता है।

कांग्रेस का कहना है कि यदि जनगणना की प्रक्रिया में जल्दबाजी या अनावश्यक बदलाव किए जाते हैं तो इसका असर अंतिम आंकड़ों की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। पार्टी ने सरकार से प्रक्रिया और प्रश्नावली को लेकर अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की है।

सरकार से जवाब की मांग

कांग्रेस ने जनगणना 2027 के स्वरूप और उसमें शामिल की जा रही सूचनाओं को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। पार्टी का कहना है कि इतने बड़े राष्ट्रीय अभ्यास में नागरिकों से मांगी जाने वाली हर जानकारी के पीछे स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से समझाया जा सकने वाला उद्देश्य होना चाहिए।

जयराम रमेश के बयान के बाद जनगणना 2027 को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। कांग्रेस जहां इसके स्वरूप, डेटा की उपयोगिता और निजता से जुड़े सवाल उठा रही है, वहीं सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल जनगणना 2027 को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसमें जुटाई जाने वाली अतिरिक्त जानकारियों का उद्देश्य क्या होगा और इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। कांग्रेस ने सरकार से इसी मुद्दे पर स्पष्टता और पारदर्शिता की मांग करते हुए जनगणना की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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