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कांग्रेस का सत्ता में लौटना मुश्किल' मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साधा तीखा निशाना

Ratna Netam
3 Nov 2026 8:01 PM IST
कांग्रेस का सत्ता में लौटना मुश्किल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साधा तीखा निशाना
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नई दिल्ली : 3 नवंबर 2026। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए दावा किया है कि पार्टी आने वाले समय में भी विपक्ष में ही रहेगी। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार की राजनीति करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नेता सत्ता से बाहर होने के कारण परेशान हैं और जनता का विश्वास दोबारा हासिल करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने में लगे हुए हैं।मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित जोधपुर हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी जनता से अपना जुड़ाव खोती जा रही है। उनके अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व को अपनी नीतियों और कार्यशैली पर आत्ममंथन करना चाहिए।शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देती रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता सर्वोपरि होती है और कोई भी राजनीतिक दल केवल अपने पुराने इतिहास के आधार पर सत्ता में बने रहने का दावा नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी विकास और जनकल्याण की राजनीति कर रही है, जबकि कांग्रेस नकारात्मक राजनीति में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब राजनीतिक दलों के कामकाज और उनके प्रदर्शन के आधार पर निर्णय लेती है।भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस नेताओं की ओर से संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जा रहे आरोपों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री के अनुसार, चुनावी हार के बाद संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित राजनीतिक परंपरा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब चुनाव जीतती है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास जताती है, लेकिन हार मिलने पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने लगती है।उन्होंने कहा कि देश की जनता लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के पक्ष में है। उनके मुताबिक, राजनीतिक दलों को अपनी असफलताओं का कारण तलाशने के लिए जनता के बीच जाना चाहिए।
हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का पक्ष इससे अलग है। विपक्ष लगातार चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सवाल उठाता रहा है। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।हाल ही में दिल्ली में विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी किया था। ऐसे राजनीतिक माहौल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए भाजपा के राजनीतिक संघर्ष और विस्तार की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाजपा ने लंबे समय तक विपक्ष में रहते हुए जनता के बीच काम किया और धीरे-धीरे अपना जनाधार मजबूत किया।भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, लेकिन कांग्रेस की वर्तमान स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
शर्मा ने दावा किया कि कांग्रेस के नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जनता के बीच विश्वास बनाने के लिए केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि धरातल पर काम करना जरूरी होता है।राजस्थान की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच लंबे समय से सीधी प्रतिस्पर्धा रही है। प्रदेश में दोनों दल बारी-बारी से सरकार बनाते रहे हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया गया था।दूसरी ओर, कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जैसे नेताओं के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियां जारी रखी हैं।
कांग्रेस लगातार राज्य सरकार से रोजगार, विकास योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह दावा कि कांग्रेस भविष्य में भी विपक्ष में रहेगी, राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। भविष्य के चुनाव परिणाम मतदाताओं के निर्णय पर ही निर्भर करेंगे।मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपनी सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है और जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का उद्देश्य प्रदेश के सभी क्षेत्रों में विकास सुनिश्चित करना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे, जनकल्याण और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
राजस्थान में आगामी चुनावों को लेकर भी राजनीतिक दल अपनी तैयारियां तेज कर रहे हैं। स्थानीय निकाय चुनावों के बाद पंचायत स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं। भाजपा इन चुनावों में अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत बनाने का प्रयास कर रही है।वहीं, कांग्रेस सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, स्थानीय चुनावों में प्रदर्शन भविष्य की चुनावी रणनीति पर प्रभाव डाल सकता है।मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर हमला ऐसे समय आया है, जब राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज है। भाजपा अपने विकास कार्यों और संगठनात्मक ताकत के आधार पर भविष्य के चुनावों में सफलता हासिल करने का दावा कर रही है।दूसरी तरफ कांग्रेस सत्ता में वापसी की संभावनाएं तलाश रही है। पार्टी नेताओं का कहना रहा है कि जनता सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करेगी और आने वाले चुनावों में अपना फैसला सुनाएगी।
राजनीतिक दृष्टि से मुख्यमंत्री के बयान का उद्देश्य भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना और कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाना भी माना जा सकता है। हालांकि, यह राजनीतिक आकलन है और मुख्यमंत्री के बयान से चुनावी नतीजों का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राज्य में राजनीतिक दलों की सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सरकार का प्रदर्शन, विपक्ष की सक्रियता, स्थानीय नेतृत्व, संगठन की मजबूती और जनता की अपेक्षाएं शामिल होती हैं।राजस्थान की राजनीति में भी इन सभी कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दल अपने-अपने मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचने की कोशिश करेंगे।फिलहाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयान ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस को एक नया मुद्दा दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि भाजपा भविष्य में भी कांग्रेस को कड़ी राजनीतिक चुनौती देने की तैयारी में है।अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री के इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और आने वाले चुनावों में जनता किस राजनीतिक दल के पक्ष में अपना विश्वास व्यक्त करती है।
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