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नई दिल्ली। हिंदू धर्म की धार्मिक मान्यताओं और गौ पूजा की परंपरा को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करने वाले इजरायली-अमेरिकी यहूदी धर्मगुरु रब्बी योसी मिजराही विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल होने के बाद भारत और इजरायल में लोगों ने उनकी कड़ी आलोचना की है। वीडियो में मिजराही हिंदुओं की गाय के प्रति धार्मिक आस्था का उपहास उड़ाते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने गोमूत्र से जुड़ी परंपराओं को लेकर विवादास्पद दावे किए और भारतीय डॉक्टरों के संबंध में भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उनके बयान को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने धार्मिक असहिष्णुता और भारतीयों के प्रति अपमानजनक रवैये का उदाहरण बताया है। इस घटना ने धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर धर्मगुरुओं की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, विवादित वीडियो अमेरिका से प्रसारित मिजराही के एक धार्मिक प्रवचन का हिस्सा है। यह प्रवचन 28 अक्टूबर 2026 को उनके यूट्यूब चैनल पर प्रसारित हुआ था। वीडियो का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जाने लगा, जिसके बाद उनकी टिप्पणियों को लेकर विरोध शुरू हो गया।
मिजराही ने अपने संबोधन में हिंदुओं द्वारा गाय को दिए जाने वाले धार्मिक सम्मान का मजाक उड़ाया। उन्होंने गाय और गोमूत्र से जुड़ी भारतीय परंपराओं के बारे में कई अपमानजनक दावे किए। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय चिकित्सकों को लेकर भी ऐसी बातें कहीं, जिन्हें सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा।
Interesting views on Indians, especially Hindus, held by an Israeli Rabbi: https://t.co/umSaZ8SyiP
— শ্রীজিৎ দত্ত | Sreejit Datta (@sreejit_d) October 28, 2026
गौ पूजा की परंपरा पर की विवादित टिप्पणी
हिंदू धर्म में गाय का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। अनेक हिंदू परिवारों में गाय को माता के समान सम्मान दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में गाय को करुणा, पोषण और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
गौ पूजा भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में शामिल है। विशेष रूप से गोवर्धन पूजा और अन्य धार्मिक अवसरों पर गायों की पूजा की जाती है।
हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में धार्मिक परंपराओं का स्वरूप भिन्न हो सकता है। किसी एक प्रथा के आधार पर पूरे धर्म या उसके अनुयायियों के बारे में सामान्यीकृत टिप्पणी करना उचित नहीं माना जाता।
वायरल वीडियो में मिजराही ने हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं को इसी प्रकार सामान्यीकृत करते हुए उनका उपहास किया। उनकी टिप्पणियों में धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान का अभाव दिखाई देने की बात आलोचकों ने कही है।
भारतीय डॉक्टरों को लेकर भी आपत्तिजनक बयान
मिजराही का विवाद केवल गौ पूजा पर की गई टिप्पणियों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारतीय डॉक्टरों का उल्लेख करते हुए भी आपत्तिजनक बातें कहीं।
वीडियो में उन्होंने एक काल्पनिक उदाहरण के जरिए नई दिल्ली के चिकित्सकों के बारे में टिप्पणी की। उनके बयान को भारतीय चिकित्सा समुदाय की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत करने वाला बताया गया।
सोशल मीडिया पर आलोचकों ने सवाल उठाया कि किसी देश के चिकित्सकों की पेशेवर योग्यता या वैज्ञानिक समझ का आकलन धार्मिक मान्यताओं के आधार पर कैसे किया जा सकता है।
भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी संख्या में डॉक्टर आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के आधार पर मरीजों का उपचार करते हैं। ऐसे में किसी धर्म की मान्यताओं को चिकित्सकों की पेशेवर क्षमता से जोड़कर उनका उपहास करना अनुचित सामान्यीकरण माना जा रहा है।
भारत और इजरायल में हुई तीखी आलोचना
विवादित वीडियो सामने आने के बाद भारत के सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने मिजराही की टिप्पणियों पर नाराजगी जताई।
कई लोगों ने कहा कि धार्मिक विश्वासों के बारे में असहमति व्यक्त करना अलग बात है, लेकिन किसी धर्म या समुदाय की आस्था का मजाक उड़ाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
इस मामले में इजरायल से जुड़े कुछ लोगों ने भी आलोचना की है। इजरायली शोधकर्ता येशाया रोजेनमैन ने मिजराही की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस प्रकार के बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
भारत में फलस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने भी धार्मिक असहिष्णुता से संबंधित एक प्रतिक्रिया साझा की। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इस विवाद से जुड़े वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया था।
इन प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
कौन हैं विवादित धर्मगुरु योसी मिजराही?
योसी मिजराही इजरायली मूल के अमेरिकी यहूदी धर्मगुरु और धार्मिक वक्ता हैं। वे इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने धार्मिक प्रवचनों का प्रसारण करते हैं।
मिजराही पहले भी अपने कई विवादित बयानों को लेकर आलोचना का सामना कर चुके हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पहले ऑटिज्म और डाउन सिंड्रोम जैसी स्थितियों को लेकर भी विवादास्पद धार्मिक दावे किए थे। इन टिप्पणियों की आलोचना धार्मिक और सामाजिक स्तर पर हुई थी।
दिसंबर 2016 में 16 रूढ़िवादी यहूदी रब्बियों ने उनके प्रचार के तरीकों की निंदा की थी। उस समय भी उनके बयानों को लेकर धार्मिक समुदाय के भीतर गंभीर असहमति सामने आई थी।
धार्मिक सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस
इस विवाद ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक समुदायों के सम्मान के बीच संतुलन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
किसी भी व्यक्ति को धार्मिक विचारों की आलोचना करने या उनसे असहमति व्यक्त करने का अधिकार है। लेकिन आलोचना और किसी धर्म के अनुयायियों का अपमान करने के बीच महत्वपूर्ण अंतर होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सार्वजनिक मंचों पर बोलने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों की जिम्मेदारी अधिक होती है, क्योंकि उनके विचार बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचते हैं।
धर्मगुरुओं के बयानों का प्रभाव उनके अपने समुदाय तक सीमित नहीं रहता। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे बयान विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों तक तेजी से पहुंच जाते हैं।
भारत-इजरायल संबंधों के बीच चर्चा में आया विवाद
भारत और इजरायल के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में सहयोग रहा है। दोनों देशों के नागरिकों के बीच भी सांस्कृतिक और पर्यटन संबंध मौजूद हैं।
ऐसे में किसी धार्मिक वक्ता की ओर से भारतीय धार्मिक मान्यताओं को लेकर की गई अपमानजनक टिप्पणी सोशल मीडिया पर संवेदनशील मुद्दा बन गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि मिजराही का बयान उनका व्यक्तिगत धार्मिक संबोधन है। इसे इजरायल सरकार, वहां के सभी नागरिकों या पूरे यहूदी समुदाय का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता।
अब तक उपलब्ध रिपोर्टों में इस मामले पर इजरायल सरकार की किसी औपचारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल मिजराही के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना जारी है। यह विवाद दिखाता है कि धार्मिक विविधता वाले समाज में सार्वजनिक अभिव्यक्ति के दौरान संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।





