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चुनावी हार के बाद CPI(M) में मंथन तेज

Kavita2
6 Sept 2026 2:59 PM IST
चुनावी हार के बाद CPI(M) में मंथन तेज
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नई दिल्ली: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने संगठन के भीतर मौजूद कमजोरियों को दूर करने के लिए सुधार अभियान शुरू किया है। पार्टी ने संसदीय कामकाज से भटकाव, सामूहिक नेतृत्व और कामकाज की कमी तथा जनता के बीच पहुंच बनाने वाली मास लाइन को लागू करने में खामियों जैसी समस्याओं की पहचान की है।

यह कदम खासतौर पर केरल में चुनावी प्रदर्शन कमजोर रहने के बाद उठाया गया है। पार्टी नेतृत्व अब संगठन को मजबूत करने और कार्यशैली में सुधार लाने की दिशा में काम कर रहा है।

पोलित ब्यूरो बैठक में हुई चर्चा

जानकारी के अनुसार, CPI(M) पोलित ब्यूरो की शुक्रवार और शनिवार को हुई बैठक में सुधार अभियान से जुड़ी रिपोर्ट पर चर्चा की गई।

बैठक में पार्टी के भीतर मौजूद चुनौतियों और संगठनात्मक कमियों को लेकर मंथन किया गया। इसके बाद केंद्रीय समिति की आगामी बैठक में इस रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी।

CPI(M) केंद्रीय समिति की बैठक 9 से 11 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित है, जिसमें सुधार अभियान और इससे जुड़े सुझावों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

73 सवालों वाली प्रश्नावली जारी

पार्टी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए 73 सवालों वाली एक प्रश्नावली तैयार की है।

इस प्रश्नावली के माध्यम से पार्टी यह समझने की कोशिश कर रही है कि संगठन के स्तर पर कहां-कहां कमियां रह गई हैं और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है।

नेताओं से पार्टी की कार्यशैली, जनता से जुड़ाव, संगठन की सक्रियता और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर जवाब मांगे गए हैं।

संसदीय राजनीति पर भी मंथन

CPI(M) ने पार्टी के भीतर संसदीय कामकाज को लेकर भी चिंता जताई है। पार्टी का मानना है कि कई स्तरों पर संसदीय गतिविधियों में अधिक ध्यान जाने से जमीनी स्तर पर संगठन का काम प्रभावित हुआ है।

नेतृत्व इस बात की समीक्षा कर रहा है कि पार्टी अपने मूल जनआधारित राजनीतिक मॉडल से किस हद तक जुड़ी हुई है।

मास लाइन को मजबूत करने पर जोर

CPI(M) की राजनीति में मास लाइन यानी जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उनके आधार पर राजनीतिक कार्यक्रम तैयार करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

पार्टी ने माना है कि इस नीति को लागू करने में कुछ कमियां सामने आई हैं। अब संगठन को दोबारा जनता के बीच सक्रिय करने पर जोर दिया जा रहा है।

केरल में हार के बाद बढ़ी चिंता

केरल CPI(M) के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यहां चुनावी प्रदर्शन में गिरावट के बाद पार्टी नेतृत्व ने संगठन की स्थिति पर गंभीर समीक्षा शुरू की है।

पार्टी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जनता से दूरी बढ़ने, संगठनात्मक कमजोरी और राजनीतिक रणनीति में कहां कमी रही।

नेताओं की कार्यशैली की होगी समीक्षा

सुधार अभियान के तहत पार्टी अपने नेताओं की कार्यशैली और जिम्मेदारियों की भी समीक्षा करेगी।

यह देखा जाएगा कि नेता कितनी सक्रियता से जनता के बीच काम कर रहे हैं और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भूमिका कैसी है।

संगठन को मजबूत करने की तैयारी

CPI(M) का उद्देश्य सुधार अभियान के जरिए संगठन को फिर से मजबूत करना है। पार्टी चाहती है कि कार्यकर्ता और नेता जमीनी मुद्दों पर ज्यादा सक्रिय हों और आम लोगों से सीधा संवाद बढ़ाएं।

नेतृत्व का मानना है कि राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए संगठन की आंतरिक मजबूती जरूरी है।

केंद्रीय समिति की बैठक में तय होगी आगे की दिशा

अब सभी की नजर अक्टूबर में होने वाली केंद्रीय समिति की बैठक पर है। इस बैठक में सुधार रिपोर्ट पर अंतिम चर्चा होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

CPI(M) के लिए यह अभियान केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी की भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

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