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ग्रेटर नॉएडा के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने सारी हदें की पार, जानिए पूरा मामला

Admin Delhi 1
1 Oct 2022 6:24 AM GMT
ग्रेटर नॉएडा के सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने सारी हदें की पार, जानिए पूरा मामला
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एनसीआर नॉएडा न्यूज़: गौतमबुद्ध नगर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की संवेदनहीनता ने सारी हदें पार कर दीं। मामला ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS Greater Noida) से जुड़ा है। शहर की जानी-मानी सोशल वर्कर कावेरी राणा और उनकी सहयोगी यशोमती को जगत फार्म में एक व्यक्ति मिला। जिसके पांव में कीड़े पड़े हुए हैं। सोशल वर्कर बेहाल और बेघर बीमार को लेकर जिम्स पहुंच गईं। कावेरी राणा का कहना है, "मरीज के पांव में पड़े कीड़े देखकर डॉक्टर भाग खड़े हुए। करीब एक घंटे तक मरीज स्ट्रेचर पर पड़ा रहा। इलाज तो दूर किसी डॉक्टर ने पास आकर देखना तक मुनासिब नहीं समझा। जब एक डॉक्टर से हाथ जोड़कर निवेदन किया गया तो उन्होंने पर्चा थमा दिया। जिस पर सेवलोन और तारपीन का तेल लाने की हिदायत दी थी।"

"ऐसे डॉक्टरों को शर्म से डूब मरना चाहिए"

कावेरी राणा कहती हैं, "मरीज का पैर सड़ गया है। उसके पांव में गैंगरीन हो गया है। कीड़े पांव खा रहे हैं। उसे इलाज की सख्त जरूरत है। हम लोग गौतमबुद्ध नगर का सबसे बड़ा अस्पताल समझकर जिम्स पहुंच गए। हमें क्या पता था कि सबसे बड़े अस्पताल के डॉक्टर कितने नाकारा हैं। मरीज को देखते ही नाको में रुई ठूंस ली। किसी ने उसे एक बार देखने की हिम्मत नहीं जुटाई। जिस अस्पताल में सेवलोन नहीं है, वहां ऐसे संकट में घिरे मरीज का इलाज कैसे हो सकता है? लिहाजा, एक घंटे तक संघर्ष करने के बाद हम लोगों ने उस व्यक्ति को किसी बेहतर अस्पताल में भर्ती करवाना मुनासिब समझा।"

कावेरी राणा आगे कहती हैं, "इन सरकारी डॉक्टरों को शर्म से डूब कर मर जाना चाहिए। इनके अंदर बिल्कुल भी इंसानियत नहीं है। मैं पशुओं के लिए काम करती हूं। हमें कीड़ों से खाए हुए कुत्ते सड़क पर मिलते हैं। हम उन्हें उठाकर लाते हैं और अस्पताल आते ही 3 मिनट में इलाज शुरू कर देते हैं। एक जीता जागता इंसान एक घंटे तक सरकारी अस्पताल में पड़ा रहा, लेकिन डॉक्टरों को दया नहीं आई।"

पत्रकार की मदद से फेलिक्स अस्पताल में भर्ती करवाया गया: पशु प्रेमी कावेरी राणा ने बताया कि शुक्रवार को जगत फार्म में उड़ीसा के रहने वाले अजय सड़क पर बैठे हुए थे। उनके पैर में काफी गहरा जख्म हो रखा है। पैर बुरी तरह से सड़ गया है। फुटपाथ पर रहने वाले अजय के पैर में कांच लगने से यह दिक्कत आई है। मेरे साथी यशोमती किसी काम से जगत फार्म गई थी। उन्होंने अजय को इस बुरे हाल में देखा। फोन करके मुझे जानकारी दी। मैं बाहर थी मुझे मौके पर पहुंचने में समय लग गया इस बीच यशोमती अजय को लेकर जिम्स चली गई थीं। कावेरी ने कहा, "मैंने जब जिम्स अस्पताल के डॉक्टरों का हाल देखा तो पत्रकार विनोद कापड़ी से संपर्क किया। उन्होंने हम लोगों की मदद की। नोएडा में फेलिक्स अस्पताल के मालिक डॉ.डीके गुप्ता को फोन किया। डॉक्टर गुप्ता ने तत्काल अजय को उनके अस्पताल में लाने की बात कही। हम लोग अजय को देर रात फेलिक्स अस्पताल लेकर पहुंचे हैं। यहां उनका उपचार किया जा रहा है।" समाचार लिखे जाने तक कावेरी राणा और यशोमती फेलिक्स अस्पताल में ही मौजूद हैं। कावेरी कहती हैं कि जिम्स अस्पताल के स्टाफ की संवेदनहीनता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि किसी ने स्ट्रेचर तक धकेलने की जहमत नहीं उठाई। हम दोनों महिलाएं एक घंटे तक स्ट्रेचर को अस्पताल में एक कोने से दूसरे कोने पर डॉक्टर के पास ले जाती रहीं।"

कावेरी का सवाल- सरकार झूठ बोल रही है या जिम्स के डॉक्टर:

कावेरी राणा का आरोप है कि इलाज न होने की वजह से खुद ही उस व्यक्ति को इमरजेंसी से स्टेचर पर लेकर आई थीं। इसमें स्टाफ ने मदद नहीं की। उनका एक सवाल भी है, सरकार चिकित्सा सुविधा के लिए दावे कर रही है, लेकिन हक़ीकत कुछ ओर बयां कर रही है। मरीज़ों को भी अस्पताल में देखरेख करने वाला कोई नहीं है। अब इलाज न मिलने पर नोएडा के एक निजी अस्पताल में लेकर आए हैं। सरकार झूठ बोल रही है या जिम्स के डॉक्टर झूठे हैं। उनके पास तो पट्टी बांधने के लिए एंटीसेप्टिक लोशन तक नहीं है।

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