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इनलैंड वॉटरवेज से खुलेगा छोटे किसानों के निर्यात का रास्ता: पूर्व DG शिपिंग अमिताभ कुमार
SHIDDHANT
30 Oct 2025 8:40 PM IST

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Delhi दिल्ली। भारत में इनलैंड वॉटरवेज (अंतर्देशीय जलमार्ग) को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन अब विशेषज्ञ इसे छोटे और मध्यम किसानों के लिए निर्यात का नया रास्ता मान रहे हैं। पूर्व महानिदेशक (DG) शिपिंग अमिताभ कुमार ने कहा है कि यदि भारत अपने नदी मार्गों और जलपरिवहन नेटवर्क का सही उपयोग करे, तो यह न केवल लॉजिस्टिक कॉस्ट को कम करेगा बल्कि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से सीधे जोड़ सकता है। अमिताभ कुमार ने एक सम्मेलन में कहा, “हमारे देश के पास लगभग 14,500 किलोमीटर लंबा नौगम्य जलमार्ग नेटवर्क है, लेकिन इसका उपयोग बहुत सीमित रूप से हो रहा है। यदि हम इसे पूरी तरह से विकसित कर पाते हैं, तो गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा और महानदी जैसे नदी मार्ग भारत के अंदर माल ढुलाई और निर्यात के लिए प्रमुख गलियारे बन सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि सड़क और रेल परिवहन की तुलना में जलमार्ग से परिवहन की लागत लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती होती है। “यह किसानों और ग्रामीण उत्पादकों के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि उन्हें अपने कृषि उत्पादों, सब्जियों, फलों, और डेयरी वस्तुओं को सीधे बंदरगाहों तक पहुंचाने की सुविधा मिले, तो वे बिना बिचौलियों के अपने सामान को विदेश भेज सकते हैं। पूर्व DG शिपिंग ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की जल मार्ग विकास परियोजना (Jal Marg Vikas Project) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) के प्रयासों से कई नदी मार्गों पर व्यावसायिक यातायात शुरू हो चुका है। “वाराणसी से हल्दिया तक का राष्ट्रीय जलमार्ग-1 अब पूरी तरह से संचालन में है, और इसी तरह असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर भी मालवाहक नौकाओं की आवाजाही बढ़ रही है,” उन्होंने कहा।
कुमार ने जोर देते हुए कहा कि जलमार्गों के जरिए किसानों को कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं और सप्लाई चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ना जरूरी है। “यदि छोटे किसानों के उत्पादों को नदियों के किनारे स्थित ‘रिवर पोर्ट्स’ से सीधे कंटेनर टर्मिनल तक भेजा जाए, तो निर्यात की प्रक्रिया सुलभ और किफायती हो जाएगी,” उन्होंने कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य सरकारें, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम, जहां बड़े नदी तंत्र हैं, उन्हें स्थानीय किसानों और सहकारी समितियों के साथ मिलकर जलमार्ग आधारित निर्यात क्लस्टर विकसित करने चाहिए। अमिताभ कुमार ने यह भी कहा कि इनलैंड वॉटरवेज के जरिए कृषि निर्यात के नए केंद्र उभर सकते हैं, जैसे वाराणसी, पटना, भागलपुर, गुवाहाटी और कोलकाता। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने अंत में कहा, “भारत के पास समुद्र तटों के साथ-साथ विशाल नदी तंत्र भी है। अगर हम सड़क, रेल और जलमार्ग को मिलाकर मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक नेटवर्क तैयार कर लें, तो हमारा देश कृषि निर्यात में एक बड़ी शक्ति बन सकता है। यह प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘डबल फार्मर इनकम’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।
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