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'असरदार लोग भी आए थे ट्रांसफर रुकवाने', मनोहर लाल ने खत्म किया CPWD का 'दिल्ली क्लब'
nidhi
20 July 2026 12:56 PM IST

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ट्रांसफर रोकने की कोशिशें नहीं आईं काम, मनोहर लाल ने CPWD में लिया बड़ा फैसला
New Delhi: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने CPWD में ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रभावशाली लोग भी तबादले रुकवाने के लिए पहुंचे थे, लेकिन पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों से समझौता नहीं किया गया। जानिए पूरा मामला।
‘असरदार लोग भी आए थे ट्रांसफर रुकवाने', केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने खत्म किया CPWD का दिल्ली क्लब
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) में तबादला व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग में वर्षों से चली आ रही कथित 'दिल्ली क्लब' की संस्कृति को समाप्त कर दिया गया है। मंत्री के अनुसार, तबादलों के दौरान कई प्रभावशाली और असरदार लोग भी कुछ अधिकारियों के ट्रांसफर रुकवाने के लिए पहुंचे, लेकिन सरकार ने किसी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं किया।
मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा नियुक्ति और तबादले केवल निर्धारित नियमों और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर किए जाएंगे।
क्या है 'दिल्ली क्लब' का संदर्भ?
मंत्री ने अपने बयान में 'दिल्ली क्लब' का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि लंबे समय से कुछ अधिकारी राजधानी में ही तैनात रहने या अपने तबादले रुकवाने के लिए प्रभाव का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने कहा कि अब इस व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं ताकि सभी अधिकारियों को समान अवसर मिल सके।
उनके अनुसार, किसी भी कर्मचारी की पोस्टिंग या ट्रांसफर व्यक्तिगत प्रभाव के बजाय विभागीय आवश्यकता के आधार पर होना चाहिए।
‘असरदार लोग भी पहुंचे थे'
मनोहर लाल ने कहा कि ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान कई प्रभावशाली लोग व्यक्तिगत सिफारिश लेकर आए, लेकिन किसी की सिफारिश के आधार पर निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने दोहराया कि सरकार की नीति स्पष्ट है कि नियमों से ऊपर कोई नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक सुधार करने हैं तो निष्पक्ष निर्णय लेना आवश्यक है, चाहे उस पर कितना भी दबाव क्यों न हो।
ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विभाग में ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें—
ट्रांसफर नियमों के अनुसार हों।
व्यक्तिगत सिफारिशों की गुंजाइश कम हो।
प्रशासनिक जरूरतों को प्राथमिकता मिले।
जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
सभी अधिकारियों के साथ समान व्यवहार किया जाए।
उनका कहना था कि इससे विभाग की कार्यक्षमता और विश्वास दोनों मजबूत होंगे।
प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम
सरकार पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न विभागों में प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रांसफर और पोस्टिंग की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी तो इससे कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा और कार्य संस्कृति में सुधार आएगा।
पारदर्शी व्यवस्था से—
पक्षपात की आशंका कम होती है।
कार्यस्थल पर निष्पक्षता बढ़ती है।
प्रशासनिक दक्षता में सुधार होता है।
सार्वजनिक विश्वास मजबूत होता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा
मंत्री के इस बयान के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे सरकारी तंत्र में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे विभागीय कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
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