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इंडो-पैसिफिक वैश्विक विकास का इंजन बना रहना चाहिए : Jaishankar

Delhi दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को वैश्विक विकास और स्थिरता के लिए एक प्रमुख “ड्राइवर” बने रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्वाड देशों को इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और आर्थिक विकल्पों को मजबूत करने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए।
मंगलवार को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में अपने शुरुआती संबोधन के दौरान जयशंकर ने इंडो-पैसिफिक में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए “भरोसेमंद और पारदर्शी साझेदारी” की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र केवल रणनीतिक महत्व का ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने कहा, “हमारा फोकस स्पष्ट रूप से इंडो-पैसिफिक पर रहेगा, जो क्वाड की मुख्य सीमा है।” उनके अनुसार, यह क्षेत्र आज वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, व्यापार मार्गों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।
जयशंकर ने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिनमें सप्लाई चेन की मजबूती, कनेक्टिविटी में रुकावटें, मैन्युफैक्चरिंग और संसाधनों का सीमित केंद्रित होना तथा बुनियादी ढांचे की कमी जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों का समाधान अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के माध्यम से ही संभव है।
उन्होंने आगे कहा कि हर चुनौती सहयोग और साझेदारी के लिए एक नया अवसर प्रदान करती है। उनके अनुसार, क्वाड जैसे मंच इन मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना केवल क्षेत्रीय देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि क्वाड देशों की जिम्मेदारी है कि वे समुद्री सुरक्षा को मजबूत करें, नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दें और विकास के नए अवसरों को प्रोत्साहित करें। इसके साथ ही उन्होंने पारदर्शी और भरोसेमंद सहयोग को आगे बढ़ाने की बात दोहराई।
कुल मिलाकर, जयशंकर के बयान ने एक बार फिर इस बात को स्पष्ट किया है कि भारत और उसके साझेदार देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को स्थिर, सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।





