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कनाडा में खालिस्तानी जनमत संग्रह पर भारत का कड़ा विरोध

nidhi
10 Oct 2026 7:51 AM IST
कनाडा में खालिस्तानी जनमत संग्रह पर भारत का कड़ा विरोध
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भारत ने जताई आपत्ति
नई दिल्ली: कनाडा में प्रस्तावित खालिस्तानी जनमत संग्रह को लेकर भारत सरकार ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने कनाडा की धरती से संचालित भारत-विरोधी गतिविधियों की निंदा करते हुए देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह मामला प्रतिबंधित खालिस्तानी समर्थक संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से कनाडा के एडमंटन में 18 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित तथाकथित जनमत संग्रह से जुड़ा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत सभी भारत-विरोधी गतिविधियों की कड़ी निंदा करता है। भारत का मानना है कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने वाली गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
एडमंटन में 18 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, SFJ ने कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के एडमंटन में 18 अक्टूबर को खालिस्तान के समर्थन में जनमत संग्रह आयोजित करने की योजना बनाई है। संगठन विदेशों में ऐसे कार्यक्रम पहले भी आयोजित करता रहा है। भारत इन गतिविधियों का विरोध करता है और इन्हें देश की एकता तथा अखंडता के लिए चुनौती मानता है। भारत में SFJ को गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है। संगठन की गतिविधियों को लेकर भारतीय एजेंसियां लगातार चिंता जताती रही हैं।
भारत ने पहले भी उठाया है खालिस्तानी गतिविधियों का मुद्दा
भारत लंबे समय से कनाडा की धरती से संचालित खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियों पर चिंता जताता रहा है। विदेश मंत्रालय ने पहले भी कनाडाई अधिकारियों से भारत-विरोधी गतिविधियों, भारतीय राजनयिकों को धमकियों और हिंसा के महिमामंडन से जुड़े मामलों पर प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। भारत का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, जो किसी देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देती हों। वहीं, कनाडा की आधिकारिक नीति में भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता को मान्यता देने की बात कही गई है।
कनाडा के साथ संबंधों पर पड़ सकता है असर
भारत और कनाडा के संबंध पिछले कुछ वर्षों में कई मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण रहे हैं। खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियां दोनों देशों के बीच मतभेद के प्रमुख विषयों में शामिल हैं। हालांकि, सितंबर 2026 में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच विदेश कार्यालय स्तर की वार्ता भी हुई थी, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों में सहयोग आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। ऐसे में एडमंटन में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर भारत की आपत्ति दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दों को फिर चर्चा में ले आई है। हालांकि, इस मामले में कनाडा सरकार की ओर से किसी नई कार्रवाई या प्रतिबंध की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
भारत का रुख स्पष्ट, संप्रभुता से समझौता नहीं
विदेश मंत्रालय के बयान से स्पष्ट है कि भारत खालिस्तानी अलगाववादी गतिविधियों को लेकर अपना विरोध जारी रखेगा। सरकार का जोर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा पर है। अब 18 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम और उसके संबंध में कनाडाई प्रशासन की भूमिका पर नजर रहेगी। भारत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि वह विदेशों में होने वाली भारत-विरोधी गतिविधियों को लेकर अपनी चिंताएं संबंधित पक्षों के सामने उठाता रहेगा।
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