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खाड़ी संकट में भारत की रणनीति सफल, होर्मुज से सुरक्षित गुजरे 60 जहाज

Ratna Netam
5 Aug 2026 7:45 PM IST
खाड़ी संकट में भारत की रणनीति सफल, होर्मुज से सुरक्षित गुजरे 60 जहाज
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नई दिल्ली : हालिया खाड़ी संकट के दौरान जब ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक **होर्मुज जलडमरूमध्य** पर संकट के बादल मंडरा रहे थे, तब भारत ने अपनी सक्रिय कूटनीतिक रणनीति और नौसैनिक सतर्कता के बल पर देश की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित होने से बचा लिया। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत का सामान लेकर जा रहे **60 मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहे।** इसके साथ ही संकटग्रस्त क्षेत्र से **3,972 भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया**, जो इस पूरे अभियान की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका थी। ऐसे समय में भारत ने नौसेना, विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी। संसद में प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, पूरे संकट के दौरान भारतीय जहाजों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी गई ताकि देश के लिए आवश्यक कच्चे तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित न हो।
**होर्मुज जलडमरूमध्य** भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले इस संकरे रास्ते से वैश्विक स्तर पर होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग **20 प्रतिशत हिस्सा** गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग **90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात** करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आता है। यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित होता, तो न केवल तेल की आपूर्ति प्रभावित होती बल्कि जहाजों के बीमा, मालभाड़े और परिवहन लागत में भारी वृद्धि के कारण देश में पेट्रोल-डीजल समेत कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी व्यापक असर पड़ सकता था।
सरकार ने बताया कि संकट की स्थिति में भारतीय नाविकों और उनके परिवारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इसके लिए **24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम** स्थापित किया गया, जिसने पूरे अभियान के दौरान लगातार निगरानी और समन्वय का कार्य किया। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग कम्युनिकेशन सेंटर (MMDAC) को भी पूरी तरह सक्रिय रखा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में मौजूद भारतीय जहाजों को निर्देश दिए गए कि वे **वीएचएफ चैनल-16** के माध्यम से भारतीय नौसेना और मित्र देशों के युद्धपोतों से नियमित संपर्क बनाए रखें। साथ ही **सूचना संलयन केंद्र–हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR)** तथा **यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO)** को भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति की तत्काल सूचना देने के निर्देश जारी किए गए थे।
सरकार के मुताबिक, संकट के दौरान कंट्रोल रूम ने **15,771 फोन कॉल** प्राप्त कर उनका जवाब दिया, जबकि **36,499 ईमेल** के माध्यम से नाविकों, उनके परिजनों और शिपिंग कंपनियों को लगातार आवश्यक जानकारी और सहायता उपलब्ध कराई गई। इस तरह कुल **52 हजार से अधिक संचार अनुरोधों** का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया गया। सरकार ने बताया कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से **3,972 भारतीय नाविकों** को सुरक्षित बाहर निकालकर स्वदेश लाया गया। इस दौरान उनके परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया और आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श सहित अन्य आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
संसद में दी गई जानकारी से स्पष्ट होता है कि खाड़ी संकट के दौरान भारत ने केवल अपने व्यापारिक हितों की रक्षा ही नहीं की, बल्कि हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए प्रभावी समुद्री प्रबंधन, कूटनीतिक समन्वय और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया। भारत की इस रणनीतिक तैयारी ने संभावित आर्थिक और मानवीय संकट को काफी हद तक टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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