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रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत की नई पहल, तीन हिस्सों वाला शांति प्रस्ताव सामने

Kavita2
7 Oct 2026 11:12 AM IST
रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत की नई पहल, तीन हिस्सों वाला शांति प्रस्ताव सामने
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नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से जारी युद्ध को चार साल से अधिक समय हो चुका है। लाखों सैनिकों और नागरिकों की जान जाने, बड़े पैमाने पर विस्थापन और ऊर्जा व खाद्य आपूर्ति पर असर के बावजूद संघर्ष के समाप्त होने के स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका सहित कई देशों ने युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए हैं। अब भारत भी इस दिशा में पहले से अधिक सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है और उसने रूस तथा यूक्रेन के सामने तीन हिस्सों वाला एक व्यापक शांति प्रस्ताव रखा है।

भारत के प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य तत्काल पूर्ण राजनीतिक समझौते के बजाय उन क्षेत्रों से शुरुआत करना है, जहां दोनों पक्ष सीमित सहमति बना सकते हैं। प्रस्ताव में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने, ब्लैक सी के बंदरगाहों से अनाज और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने तथा व्यावसायिक जहाजों पर हमले बंद करने की बात शामिल है। इससे युद्धग्रस्त क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को भी राहत मिल सकती है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल में कहा कि भारत अब केवल शांति की अपील करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मॉस्को और कीव दोनों के साथ व्यावहारिक बातचीत कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा निर्यात तथा एक-दूसरे पर कुछ प्रकार के हमले रोकने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है। उनका कहना था कि यदि दोनों पक्ष सीमित प्रकृति के किसी समझौते पर भी पहुंचते हैं तो यह सकारात्मक शुरुआत होगी।

भारत की इस पहल को यूक्रेन की ओर से भी महत्व मिला है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने भारत के प्रस्ताव को हाल में सामने आए शांति प्रयासों में व्यापक बताया है। रिपोर्टों के मुताबिक यूक्रेन ऊर्जा प्रतिष्ठानों और ब्लैक सी क्षेत्र में हमले रोकने से जुड़े प्रस्तावों पर विचार करने के लिए तैयार है। हालांकि कीव का कहना है कि किसी भी व्यवस्था में बंदरगाहों और ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकना भी शामिल होना चाहिए।

रूस की ओर से भी भारत के प्रयासों को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शांति संबंधी पहल और विचारों की सराहना की है। मोदी पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक रूप से यह कहते रहे हैं कि रूस-यूक्रेन विवाद का स्थायी समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है।

भारत के शांति प्रस्ताव में ब्लैक सी को विशेष महत्व दिया गया है। यह क्षेत्र वैश्विक खाद्य और ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यूक्रेन दुनिया के बड़े अनाज निर्यातकों में शामिल है और युद्ध के दौरान उसके बंदरगाहों तथा समुद्री मार्गों पर हमलों ने कई देशों की खाद्य आपूर्ति को प्रभावित किया है। व्यावसायिक जहाजों पर हमले से बीमा लागत, परिवहन खर्च और समुद्री व्यापार का जोखिम भी बढ़ा है।

इसी तरह रूस और यूक्रेन की ऊर्जा सुविधाओं पर एक-दूसरे के हमलों का असर अंतरराष्ट्रीय ईंधन बाजार पर भी पड़ा है। हाल में यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले तेज किए हैं, जबकि रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाया है। इस कारण ईंधन उत्पादन और आपूर्ति बाधित हुई है।

भारत का मानना है कि यदि पहले ऊर्जा, अनाज और व्यावसायिक नौवहन जैसे सीमित मुद्दों पर युद्धविराम बनाया जा सके तो इससे आगे की व्यापक बातचीत के लिए माहौल तैयार हो सकता है। यह दृष्टिकोण तत्काल पूर्ण शांति समझौते से अलग है। इसमें पहले ऐसे क्षेत्रों में विश्वास बहाली की कोशिश की जा रही है, जिनका असर रूस और यूक्रेन से कहीं आगे पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपने दूसरे कार्यकाल में रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने की कोशिश करते रहे हैं। उनकी सरकार ने मॉस्को और कीव के बीच मध्यस्थता के कई प्रयास किए हैं और त्रिपक्षीय बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है। हालांकि अब तक कोई स्थायी युद्धविराम लागू नहीं हो पाया है और जमीन पर सैन्य कार्रवाई जारी है।

भारत की स्थिति इस मामले में अलग है। नई दिल्ली के रूस के साथ पुराने रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं, जबकि यूक्रेन के साथ भी भारत ने राजनयिक संपर्क बनाए रखा है। पश्चिमी देशों से गहरे संबंधों के बावजूद भारत ने रूस के साथ संवाद बंद नहीं किया। यही कारण है कि नई दिल्ली स्वयं को दोनों पक्षों से बातचीत करने की स्थिति में मानती है।

युद्ध के वैश्विक प्रभावों को देखते हुए भारत के लिए इसका समाधान आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद ऊर्जा, खाद्यान्न, उर्वरक और समुद्री परिवहन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। विशेष रूप से विकासशील देशों पर इसका अधिक असर पड़ा है।

भारत अपने प्रस्ताव को इसी व्यापक ग्लोबल साउथ के दृष्टिकोण से भी देख रहा है। युद्ध के कारण खाद्य और ईंधन की कीमतें बढ़ने से अफ्रीका, एशिया और अन्य विकासशील क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में ब्लैक सी के जरिए अनाज और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना केवल रूस और यूक्रेन का मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा है।

फिलहाल भारत के प्रस्ताव पर किसी औपचारिक व्यापक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। दोनों पक्षों के बीच युद्ध जारी है और उनके राजनीतिक तथा क्षेत्रीय मतभेद काफी गहरे हैं। इसलिए किसी व्यापक शांति समझौते तक पहुंचना आसान नहीं माना जा रहा।

इसके बावजूद भारत की तीन-स्तरीय पहल को कूटनीतिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि ऊर्जा सुविधाओं, ब्लैक सी व्यापार और व्यावसायिक जहाजों पर हमलों को रोकने पर सहमति बनती है तो यह चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध में एक सीमित लेकिन महत्वपूर्ण युद्धविराम की शुरुआत हो सकती है।

अब नजर इस बात पर है कि मॉस्को और कीव भारत की पहल को बातचीत के औपचारिक आधार के रूप में अपनाते हैं या नहीं। भारत फिलहाल दोनों पक्षों के संपर्क में है और उसका जोर पहले ऐसे व्यावहारिक समझौतों पर है, जिनसे हिंसा कम हो, महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्ग सुरक्षित रहें और आगे की शांति वार्ता के लिए भरोसे का माहौल तैयार हो सके।

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