दिल्ली-एनसीआर

भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुस्ती बरकरार, S&P ग्लोबल सर्वे में हल्की रिकवरी के संकेत

Kavita2
5 May 2026 10:25 AM IST
भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुस्ती बरकरार, S&P ग्लोबल सर्वे में हल्की रिकवरी के संकेत
x

Delhi दिल्ली: S&P ग्लोबल द्वारा सोमवार को जारी इंडस्ट्री सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां लगातार दूसरे महीने सुस्त रहीं। रिपोर्ट में बताया गया कि वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक मांग में कमी और इनपुट लागत में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही।

हालांकि, परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) में हल्की सुधार दर्ज की गई है। अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था। मार्च का स्तर पिछले चार वर्षों में सबसे निचले स्तर पर था। इसके बावजूद, अप्रैल का प्रदर्शन 2022 के बाद से दूसरा सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि सेक्टर में अभी भी दबाव बना हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, PMI के दो प्रमुख घटक—नए ऑर्डर और उत्पादन (आउटपुट)—ने भी कमजोर प्रदर्शन किया है। इन दोनों में साढ़े तीन साल के भीतर दूसरा सबसे खराब स्तर दर्ज किया गया है। यह संकेत देता है कि मांग और उत्पादन दोनों ही स्तर पर उद्योग को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

S&P ग्लोबल की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि PMI का 50.0 से ऊपर होना किसी भी सेक्टर में विस्तार (growth) को दर्शाता है, जबकि 50.0 से नीचे की रीडिंग गिरावट (contraction) का संकेत देती है। अप्रैल का 54.7 का आंकड़ा यह दर्शाता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में वृद्धि जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार धीमी हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, ने सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय मांग पर असर डाला है। इसके साथ ही कच्चे माल और इनपुट लागत में वृद्धि ने भी कंपनियों की उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे मुनाफे पर दबाव बना है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भले ही PMI 50 से ऊपर बना हुआ है, लेकिन इसकी गिरती गति संकेत देती है कि आने वाले महीनों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर तब जब वैश्विक मांग में अनिश्चितता बनी हुई है।

घरेलू स्तर पर, उद्योगों को उम्मीद है कि स्थिर आर्थिक नीतियों और घरेलू मांग में सुधार से आने वाले समय में स्थिति में सुधार हो सकता है। हालांकि, निर्यात आधारित क्षेत्रों पर वैश्विक परिस्थितियों का असर जारी रह सकता है।

कुल मिलाकर, S&P ग्लोबल की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी विस्तार की स्थिति में है, लेकिन गति कमजोर हुई है और वैश्विक चुनौतियां इसके विकास को प्रभावित कर रही हैं।

Next Story