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Indian यूथ कांग्रेस ने शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ विरोध तेज़ करने की योजना बनाई

New Delhi नई दिल्ली : इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने देशभर में कॉम्पिटिटिव एग्जामों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज़ करने का ऐलान किया है। संगठन ने यूनियन एजुकेशन मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने की मांग फिर से उठाई है और इसके लिए कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।
यूथ कांग्रेस ने बताया कि उनके विरोध के कार्यक्रम में टॉर्चलाइट मार्च, स्टूडेंट आउटरीच प्रोग्राम, धरने, प्रदर्शन और घेराव जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। संगठन का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में विभिन्न कॉम्पिटिटिव एग्जामों में आई गड़बड़ियों ने छात्रों का शिक्षा प्रणाली पर विश्वास कम कर दिया है और उन्हें अपने भविष्य को लेकर चिंता में डाल दिया है।
IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि छात्र अब अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संगठित होकर आवाज उठाने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की उदासीनता और समय पर सुधार न करना शिक्षा व्यवस्था में असमानता और निराशा को बढ़ा रहा है।
इस अभियान के तहत युवाओं और छात्रों को सीधे तौर पर आंदोलन में शामिल करने की योजना बनाई गई है। यूथ कांग्रेस ने कई राज्यों में स्थानीय इकाइयों को सक्रिय करने और छात्रों के बीच इस आंदोलन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निर्देश दिए हैं। संगठन ने कहा कि यह विरोध केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं होगा बल्कि सरकारी कार्यालयों और शिक्षा विभागों के सामने दबाव बनाने का एक लंबी अवधि का आंदोलन होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूथ कांग्रेस की यह पहल छात्रों और युवा मतदाताओं के बीच राजनीतिक संदेश पहुंचाने का एक तरीका भी है। उनका उद्देश्य केंद्र सरकार को शिक्षा सुधार के मुद्दों पर जवाबदेह बनाना और भविष्य में कॉम्पिटिटिव एग्जामों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
सूत्रों के मुताबिक, आंदोलन की योजना में राज्यों में अलग-अलग समय पर कार्यक्रम आयोजित करने और छात्रों को सुरक्षित और संगठित तरीके से प्रदर्शन में शामिल कराने के लिए व्यापक रणनीति बनाई गई है। इससे पहले भी कई बार कॉम्पिटिटिव एग्जामों में गड़बड़ियों के आरोपों के बाद केंद्र सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा है।
IYC का कहना है कि छात्रों और युवाओं का अधिकार है कि वे अपने भविष्य को प्रभावित करने वाली नीतियों पर सवाल उठाएं और अपने अधिकारों की रक्षा करें। संगठन का यह भी दावा है कि उनका आंदोलन किसी भी तरह से हिंसात्मक नहीं होगा और सभी गतिविधियां शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की जाएंगी।
इस पहल के बाद आने वाले हफ्तों में देश के प्रमुख शहरों में टॉर्चलाइट मार्च और प्रदर्शन के आयोजन की संभावना है। छात्रों और युवा संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन और व्यापक और सक्रिय रूप ले सकता है।





