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भारतीय नौसेना का ‘माहे’, एंटी सबमरीन मिशन में स्वदेशी शक्ति का नया अध्याय
SHIDDHANT
16 Nov 2025 10:28 PM IST

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Delhi दिल्ली: भारतीय नौसेना को जल्द ही एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘माहे’ मिलने जा रहा है। भारतीय नौसेना के मुताबिक, ‘माहे’ को तटीय इलाकों में उच्च जोखिम वाले मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी क्षमताएं इसे एक शक्तिशाली व उथले जल का योद्धा बनाती हैं। यह पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है। इस शैलो वॉटर क्राफ्ट का नाम मालाबार तट स्थित ऐतिहासिक नगर ‘माहे’ पर रखा गया है। माहे को सांस्कृतिक समृद्धि और समुद्री इतिहास के लिए जाना जाता है।
नौसेना का कहना है कि 24 नवंबर 2025 को मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना अपनी स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता में यह एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज करने जा रही है। 24 नवंबर को भारतीय नौसेना का पहला माहे क्लास एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा। यह भारतीय स्वदेशी क्षमता का प्रतीक है। इसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड द्वारा किया गया है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित ‘माहे’ भारत के आत्मनिर्भर भारत विजन का सशक्त उदाहरण है।
इस श्रेणी के कुल 8 एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शेलो वॉटर क्राफ्ट जहाजों में माहे पहला है। इन शेलो वॉटर क्राफ्ट्स को विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है।नौसेना का कहना है कि इसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इसमें उन्नत सेंसर, हथियार और आधुनिक इंटीग्रेशन सिस्टम हैं। यह तटीय क्षेत्रों में तेजी से तैनाती और उच्च गतिशीलता प्रदान करने में सक्षम है। नौसेना के ‘माहे’ को तटीय इलाकों में उच्च जोखिम वाले मिशनों के लिए विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है। इसकी क्षमताएं इसे एक शक्तिशाली उथले जल का योद्धा बनाती हैं। इसकी मुख्य परिचालन भूमिकाओं की बात करें तो यह एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में उथले समुद्र में दुश्मन पनडुब्बियों की खोज और उन्हें नष्ट करेगा।
कोस्टल पेट्रोलिंग व तटीय सुरक्षा और निगरानी में तैनात किया जाएगा। इससे मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस में वृद्धि होगी। प्रमुख समुद्री मार्गों एवं बंदरगाहों की सुरक्षा बढ़ेगी। विशेष मिशनों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी। इस शेलो क्राफ्ट का क्रेस्ट विशेष तौर पर आकर्षित करता है। इसमें उरुमि—कलारीपयट्टु की लचीली तलवार को दर्शाया गया है। यह फुर्ती, सटीकता, घातक क्षमता व समुद्री चुनौतियों से निपटने की दक्षता का प्रतीक है। माहे का कमीशन होना सिर्फ एक जहाज का नौसेना में शामिल होना नहीं है, बल्कि भारत की डिजाइन–टू–डिलीवरी क्षमता का प्रमाण है।
यह तेज, चपल और आधुनिक स्वदेशी लड़ाकू जहाजों के नए युग की शुरुआत है व तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमताओं में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी है। यही कारण है कि 24 नवंबर का दिन भारतीय नौसेना के स्वदेशी युद्धपोत इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। माहे न सिर्फ तटवर्ती रक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि यह भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता और तकनीकी उत्कृष्टता का गर्वपूर्ण प्रतीक बनेगा।
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