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भारतीय सेना ने श्रीलंका में बहाल किया सड़क संपर्क, सफर का समय हुआ आधा
SHIDDHANT
5 Jan 2026 7:52 PM IST

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Delhi दिल्ली। भारतीय सेना ने श्रीलंका में जर्जर हो चुके कई सड़क मार्गों को एक बार फिर वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल किया है। भारतीय सेना की यह पहल 'नेबरहुड फर्स्ट' की नीति तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की मार्गदर्शक भावना के अनुरूप है। दरअसल, श्रीलंका में हाल में भयंकर चक्रवात आया था जिसके कारण यहां भारी आपदा आई। इससे जाफना समेत कई क्षेत्रों में आवागमन और सड़क संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। इन क्षेत्रों में भारतीय सेना ने फिर से सड़क संपर्क बहाल करने का काम किया है।
भारतीय सेना के इंजीनियर्स, ऑपरेशन सागर बंधु के अंतर्गत श्रीलंका को निरंतर मानवीय सहायता प्रदान कर रहे हैं। इस अभियान के तहत भारतीय सेना, श्रीलंकाई सेना तथा रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (आरडीए) के साथ समन्वय में बाधित संचार मार्गों को पुन स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग सहायता उपलब्ध करा रही है।
भारतीय सेना के अनुसार, उन्होंने जाफना क्षेत्र में ए-35 राजमार्ग पर 120 फीट लंबे दोहरी कैरिजवे बेली ब्रिज का सफल निर्माण किया। इसके पश्चात, भारतीय सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स ने अब बी-492 राजमार्ग पर 100 फीट लंबा बेली ब्रिज निर्मित किया है। इससे सेंट्रल प्रांत (कैंडी) और उवा प्रांत (बदुल्ला) के बीच महत्वपूर्ण सड़क संपर्क स्थापित हो गया है।
चक्रवात जनित भूस्खलनों तथा मौजूदा पुलों के ध्वस्त हो जाने के कारण यह मार्ग गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था, जिससे यात्रियों को चार घंटे तक का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था। भारतीय सेना के 24 अत्यंत कुशल ब्रिजिंग विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम ने रविवार को पुल निर्माण कार्य प्रारंभ किया और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के बावजूद मात्र 1 दिन में पूर्ण पुल का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
सेना का कहना है कि इस पुल के स्थापित होने से अंतर-प्रांतीय यातायात पुनः सुचारू हो गया है। वहीं, कैंडी से बदुल्ला की यात्रा अवधि चार घंटे से घटकर दो घंटे रह गई है। इससे महत्वपूर्ण समय की बचत हुई है। यही नहीं, प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, मशीनरी और आवश्यक सेवाओं की त्वरित आवाजाही भी सुनिश्चित हुई है। इसके साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में प्रभावित समुदायों के लिए सामान्य स्थिति की बहाली में भी सहायता मिली है।
सेना ने बताया कि यहां पुल बनाने से पूर्व पुल के दोनों किनारों की भार-वहन क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुदृढ़ीकरण कार्य किए गए। इंजीनियर टास्क फोर्स द्वारा सटीक स्थल आकलन और सतत निगरानी के लिए स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन, लेजर रेंज फाइंडर (एलआरएफ), तथा उन्नत टोही उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया गया। इससे सटीकता, सुरक्षा और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा निर्माण अवधि में कमी आई।
बता दें कि श्रीलंका की मदद के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सागर बंधु ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में एक विश्वसनीय व दृढ़ साझेदार के रूप में भारत की भूमिका का सशक्त प्रमाण दिया है।
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