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भारतीय सेना में बेसिक ड्रोन ट्रेनिंग पूरी, 2027 तक इंफेंट्री के जवान बनेंगे ‘ड्रोन वॉरियर’
SHIDDHANT
21 March 2026 8:22 PM IST

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Delhi दिल्ली: ड्रोन आधुनिक युद्ध (मॉडर्न वॉरफेयर) में सबसे घातक हथियार के रूप में उभरकर सामने आया है। चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो या ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का संघर्ष-हर जगह ड्रोन की अहम भूमिका देखी गई है। पाकिस्तान के खिलाफ भारत का ऑपरेशन सिंदूर भी ड्रोन वॉरफेयर का एक सजीव उदाहरण है। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने न सिर्फ ड्रोन का प्रभावी इस्तेमाल किया, बल्कि पाकिस्तान के ड्रोन को भी मार गिराया।
भारतीय सेना पहले से ही इस नए युद्धक उपकरण के लिए खुद को तैयार कर रही थी। सेना ने तेजी से अपने ‘ड्रोन वॉरियर’ तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिसका पहला चरण अब पूरा हो चुका है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, सेना ने बेसिक ड्रोन ट्रेनिंग पूरी कर ली है। यानी अब इंफेंट्री बटालियन के हर जवान को ड्रोन की बुनियादी जानकारी और संचालन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
ड्रोन की बेसिक ट्रेनिंग यूनिट स्तर पर शुरू की गई थी। दूसरे चरण में स्पेशलाइज्ड एडवांस ट्रेनिंग भी जारी है, जिसके लिए विशेष ड्रोन ट्रेनिंग नोड तैयार किए गए हैं और उनकी संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम की खरीद और तैनाती भी तेजी से बढ़ाई जा रही है।
सेना ने इंफेंट्री की हर बटालियन में एक ड्रोन प्लाटून स्थापित किया है, जिसे ‘अश्नी प्लाटून’ नाम दिया गया है। अब तक इंफेंट्री की 380 बटालियनों में ये प्लाटून स्थापित होकर ऑपरेशनल हो चुके हैं। इन प्लाटून के पास विभिन्न प्रकार के ड्रोन उपलब्ध हैं।
इसके अलावा, ड्रोन सेंटर ट्रेनिंग अकादमी भी स्थापित की जा रही है। देहरादून स्थित आईएमए, महू का इन्फैंट्री स्कूल, और चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) में ऐसी सुविधाएं पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं। सेना के जवानों के साथ-साथ यूनिट के अधिकारियों को भी ड्रोन ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
भारतीय सेना के इस ड्रोन कॉन्सेप्ट को ‘ईगल इन द आर्म’ नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य है कि हर सैनिक ड्रोन ऑपरेट करना सीख सके। जिस तरह सैनिक अपने हथियारों को संचालित करते हैं और हमेशा अपने साथ रखते हैं, उसी तरह वे ड्रोन का भी प्रभावी उपयोग कर सकें।
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यूनिट या सैनिक की भूमिका के अनुसार ड्रोन के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जा रही है। जै- कॉम्बैट, सर्विलांस, लॉजिस्टिक्स और यहां तक कि मेडिकल एवाक्यूएशन के लिए भी सैनिकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ड्रोन ऑपरेशन के साथ-साथ दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय (काउंटर) करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।
इससे एक बहु-स्तरीय (लेयर्ड) सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जो मानव रहित प्लेटफॉर्म्स के उपयोग और उन्हें निष्क्रिय करने दोनों में सक्षम होगा। सेना का लक्ष्य है कि साल 2027 तक इंफेंट्री यूनिट के 100 प्रतिशत जवान ड्रोन ऑपरेशन में दक्ष हो जाएं।
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