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भारत बनेगा टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब, PM मोदी ने दिखाई राह
Rajeshwari Nishad
28 Oct 2026 12:19 AM IST

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC-2026) का उद्घाटन करते हुए भारत को भविष्य की तकनीकों के विकास में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का लक्ष्य दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल दूसरे देशों में विकसित तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई तकनीकों का निर्माण करके दुनिया को दिशा देने की क्षमता विकसित करेगा। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार इस्तेमाल, साइबर सुरक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता को विकसित भारत की मजबूत नींव बताया। प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और युवाओं से देश की तकनीकी प्रगति में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
भविष्य की तकनीकों में दुनिया का नेतृत्व करेगा भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी का भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। पहले भारत कई बार दूसरे देशों में विकसित तकनीकों को अपनाने या उनमें बदलाव करने तक सीमित रहता था, लेकिन अब यह सोच बदल रही है।उन्होंने कहा कि देश का लक्ष्य केवल तकनीक का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि उसका निर्माण करना और भविष्य में उसकी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना है।प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे नवाचारों पर काम करें, जिनसे भारत की जरूरतें पूरी होने के साथ दुनिया की समस्याओं का भी समाधान निकल सके।उन्होंने कहा कि भारत को महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि देश अपनी वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षमताओं को और मजबूत कर सके।
AI का इस्तेमाल करें, लेकिन आंख बंद करके भरोसा न करें
प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI आज कई क्षेत्रों में तेजी से बदलाव ला रहा है। इससे शोध, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासनिक कार्यों की गति बढ़ सकती है।
हालांकि, उन्होंने AI से मिलने वाली जानकारी की सत्यता जांचने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।प्रधानमंत्री ने कहा कि AI तेजी से जवाब दे सकता है, लेकिन उन जवाबों को सही मानने से पहले उनकी पुष्टि करना जरूरी है।उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि AI का इस्तेमाल नियमित कार्यों को आसान बनाने और समय बचाने के लिए किया जाए। इससे बचने वाले समय का उपयोग नई खोजों, कठिन वैज्ञानिक समस्याओं और प्रयोगों पर किया जा सकता है।उनका संदेश था कि तकनीक मानव की सोचने-समझने की क्षमता को मजबूत बनाए, न कि स्वतंत्र चिंतन की जगह ले।
साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साइबर सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी बदल रही हैं।विशेष रूप से वित्तीय नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी प्रणालियों को नए प्रकार के साइबर खतरों से सुरक्षित रखना आवश्यक है।उन्होंने AI आधारित साइबर सुरक्षा और क्वांटम तकनीकों के माध्यम से सुरक्षा समाधान विकसित करने पर जोर दिया।प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत को ऐसी आधुनिक तकनीकें विकसित करनी चाहिए, जो देश की संवेदनशील प्रणालियों की सुरक्षा करने के साथ मानवता के व्यापक हित में भी काम आएं।इस दिशा में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता और स्वदेशी समाधानों का विकास महत्वपूर्ण होगा।
विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और नवाचार जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित भारत का सपना वैज्ञानिक अनुसंधान, नई खोजों और नवाचार की मजबूत नींव पर ही साकार हो सकता है।उन्होंने कहा कि विज्ञान की वास्तविक सफलता केवल प्रयोगशालाओं में नई उपलब्धियां हासिल करने तक सीमित नहीं है। उसका लाभ आम लोगों के जीवन तक पहुंचना भी जरूरी है।प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान भारत में विकसित टीकों और बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान का उदाहरण देते हुए बताया कि वैज्ञानिक उपलब्धियां किस तरह समाज की जरूरतों को पूरा कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी तकनीकों पर काम करना चाहिए, जिनसे लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार आए और वैश्विक समस्याओं के समाधान में मदद मिले।
वैज्ञानिकों और स्टार्टअप को दिया तीन साल का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में शामिल वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, उद्योगपतियों, स्टार्टअप संस्थापकों और विद्यार्थियों से अगले तीन वर्षों के लिए ठोस लक्ष्य तय करने की अपील की।उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रतिभागी को यह निर्धारित करना चाहिए कि वह अगले तीन वर्षों में कौन-सी नई तकनीक, प्रोटोटाइप, पायलट परियोजना या उत्पाद विकसित करने में योगदान देगा।प्रधानमंत्री ने सम्मेलन को केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से मापने योग्य परिणाम सामने आने चाहिए, ताकि वैज्ञानिक चर्चाएं वास्तविक परियोजनाओं और उपयोगी तकनीकों में बदल सकें।उन्होंने युवाओं के आत्मविश्वास और नवाचार की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भारत में भविष्य की तकनीकों का नेतृत्व करने की प्रतिभा मौजूद है।
12 प्रमुख क्षेत्रों में नई तकनीकों पर चर्चा
तीन दिवसीय ESTIC-2026 सम्मेलन का आयोजन 27 से 29 अक्टूबर तक भारत मंडपम में किया जा रहा है।इस सम्मेलन में भारत और विदेशों के प्रमुख वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और स्टार्टअप संस्थापक हिस्सा ले रहे हैं।कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, ऊर्जा, जलवायु विज्ञान, समुद्री अनुसंधान, रोबोटिक्स और क्वांटम तकनीक जैसे 12 प्रमुख विषयों पर चर्चा की जा रही है।सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करना तथा नई खोजों को व्यावहारिक उपयोग में लाना है।
150 डीप-टेक स्टार्टअप दिखाएंगे अपनी तकनीक
ESTIC-2026 में भारतीय नवाचार और तकनीकी उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई है।इस प्रदर्शनी में लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप के स्टॉल शामिल हैं। यहां नई तकनीकों, वैज्ञानिक उपकरणों और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित किए जा रहे आधुनिक समाधानों का प्रदर्शन किया जा रहा है।इसके अलावा ग्लोबल कनेक्ट नेटवर्किंग कार्यक्रम के माध्यम से भारत और विदेशों के 300 से अधिक प्रतिभागियों को जोड़ने की पहल की गई है।इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान साझेदारी, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग तथा वैज्ञानिक खोजों को बाजार तक पहुंचाने की संभावनाओं को बढ़ावा देना है।
अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।उन्होंने चंद्रयान-3, मंगल मिशन और अंतरिक्ष तकनीक में भारतीय वैज्ञानिकों की सफलता को देश की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमता का उदाहरण बताया।प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की उपलब्धि और निजी क्षेत्र द्वारा विकसित स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीकों का भी जिक्र किया।उन्होंने कहा कि भारत को इन उपलब्धियों से आगे बढ़ते हुए नई पीढ़ी की तकनीकों के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए।
युवाओं को नवाचार के जरिए देश बदलने का संदेश
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत के पास युवा प्रतिभाओं और वैज्ञानिक क्षमताओं की बड़ी ताकत है।उन्होंने युवाओं से अनुसंधान, स्टार्टअप और आधुनिक तकनीकों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत को ऐसी पीढ़ी तैयार करनी होगी, जो भविष्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्रांति में केवल भागीदार न बने, बल्कि उसका नेतृत्व करे।
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