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PM Modi के स्वीडन दौरे के बाद भारत-स्वीडन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा

Kavita2
18 May 2026 9:59 AM IST
PM Modi के स्वीडन दौरे के बाद भारत-स्वीडन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा
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Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के दौरे के तीसरे पड़ाव के रूप में स्वीडन की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस दौरे के बाद भारत और स्वीडन के बीच संबंधों को और अधिक गहराई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने प्रधानमंत्री की इस यात्रा के छह प्रमुख परिणामों की सूची जारी की है, जो दोनों देशों के बीच सहयोग को नए स्तर पर ले जाने का संकेत देते हैं।

MEA के अनुसार, इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम भारत-स्वीडन संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक बढ़ाना है। इसके तहत दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान और संयुक्त कार्य योजना (Joint Action Plan 2026–2030) को अपनाया है, जिसका उद्देश्य आर्थिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना है।

इस कार्य योजना में सहयोग के चार प्रमुख स्तंभ तय किए गए हैं। पहला स्तंभ सुरक्षा और स्थिरता के लिए रणनीतिक संवाद को बढ़ावा देना है, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा मामलों पर बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। दूसरा स्तंभ अगली पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी को विकसित करना है, जिसमें व्यापार, निवेश और नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी।

तीसरा स्तंभ नई तकनीक और भरोसेमंद कनेक्टिविटी पर आधारित है, जिसके तहत डिजिटल सहयोग, तकनीकी विकास और सुरक्षित संचार प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। चौथा स्तंभ “कल को साथ मिलकर आकार देना” है, जिसमें लोगों, पर्यावरण और वैश्विक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से काम करने पर जोर दिया गया है।

MEA ने यह भी बताया कि इस साझेदारी के तहत आर्थिक, तकनीकी, कनेक्टिविटी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक मजबूत किया जाएगा। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की वैश्विक साझेदारी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। इस दौरे से भारत और स्वीडन के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीतिक साझेदारी न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर तकनीक, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी सहयोग को बढ़ावा देगी।

फिलहाल, भारत और स्वीडन के बीच इस नई कार्य योजना को दोनों देशों के भविष्य के सहयोग का आधार माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में रिश्तों में और मजबूती आने की संभावना है।

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