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होर्मुज स्ट्रेट हमले पर भारत की नाराजगी, MEA ने ईरानी अधिकारियों को बुलाया

Kavita2
14 July 2026 12:02 PM IST
होर्मुज स्ट्रेट हमले पर भारत की नाराजगी, MEA ने ईरानी अधिकारियों को बुलाया
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नई दिल्ली : होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारी जहाजों पर हुए हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के वरिष्ठ राजनयिकों को विदेश मंत्रालय (MEA) में तलब किया है। इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य भारतीय नागरिक घायल हुए थे। मामले को लेकर भारत ने ईरान के सामने अपनी चिंता और आपत्ति दर्ज कराई है।

विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राजनयिक बैठक की। इस बैठक में ईरान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन मोहम्मद जवाद हुसैनी समेत अन्य अधिकारियों को बुलाया गया। यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट के पास दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया था।

जानकारी के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के झंडे वाले दो तेल टैंकर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे थे। दोनों जहाज ओमानी जलक्षेत्र में थे, तभी उन्हें निशाना बनाया गया। हमले के बाद दोनों टैंकरों में आग लग गई थी, जिसे बाद में नियंत्रित कर लिया गया।



इस घटना में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई, जबकि छह अन्य भारतीय नागरिक घायल हो गए। इसके अलावा कुछ अन्य विदेशी नागरिकों के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।

भारत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ईरान के सामने अपनी चिंताएं रखीं। विदेश मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। विदेशों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भारत लगातार संबंधित देशों के संपर्क में रहता है।

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमला वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है।

भारत के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में काम करते हैं। भारतीय नाविक दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों पर अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री संकट की स्थिति में उनकी सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन जाती है।

राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, भारत ने ईरानी अधिकारियों के सामने इस हमले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की आवश्यकता को भी उठाया है। हालांकि, बैठक में हुई बातचीत का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार बयानबाजी होती रही है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ गई है।

भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र आवाजाही और सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। भारतीय हितों को देखते हुए सरकार इस तरह की घटनाओं पर करीबी नजर रख रही है।

विदेश मंत्रालय की ओर से ईरानी राजनयिकों को बुलाया जाना इस बात का संकेत है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और समुद्री व्यापार से जुड़े मामलों को लेकर गंभीर है। आने वाले दिनों में इस मामले पर भारत की ओर से आगे की कूटनीतिक कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।

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