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New technology अपनाने में पीछे न रहे भारत', पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों और युवाओं को दिया संदेश

Ratna Netam
27 Oct 2026 7:43 PM IST
New technology अपनाने में पीछे न रहे भारत, पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों और युवाओं को दिया संदेश
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नई दिल्ली : 27 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव 2026' (ESTIC 2026) के अवसर पर भविष्य की तकनीकों को अपनाने, वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और साहसिक नवाचार की जरूरत प्रमुखता से सामने आई। प्रधानमंत्री का संदेश भारत को केवल नई तकनीकों का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि उनके विकास और निर्माण में भी अग्रणी बनाने की दिशा से जुड़ा है। हालांकि, इस कार्यक्रम में उनके संबोधन के शब्दशः विवरण की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, तीन दिवसीय सम्मेलन 27 से 29 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्योगपति, शिक्षाविद, स्टार्टअप प्रतिनिधि और नीति निर्माता भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत करना और अनुसंधान को व्यावहारिक समाधानों में बदलना है।
भविष्य की तकनीकों में भारत को अग्रणी बनाने पर जोर
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भविष्य की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से उद्योगों और आम नागरिकों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दे चुके हैं।उन्होंने अपने पूर्व संबोधनों में कहा था कि किसी वैज्ञानिक विचार को प्रोटोटाइप और फिर बाजार में उपलब्ध उत्पाद में बदलने की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए। इसके लिए शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं, निवेशकों और उद्योगों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
AI और क्वांटम तकनीक पर विशेष ध्यान
ESTIC 2026 में कुल 12 प्रमुख विषयों पर चर्चा की जा रही है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाएं, ऊर्जा, जलवायु विज्ञान, समुद्री अनुसंधान और अत्याधुनिक सामग्री विज्ञान शामिल हैं।इसके अलावा सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, क्वांटम संचार और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों पर भी विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे।इन तकनीकों का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।सम्मेलन में इस बात पर विशेष चर्चा होगी कि वैज्ञानिक खोजों का लाभ सामान्य नागरिकों तक किस प्रकार पहुंचाया जाए।
150 डीप-टेक स्टार्टअप दिखाएंगे नवाचार
तीन दिवसीय आयोजन में लगभग 150 डीप-टेक स्टार्टअप अपनी तकनीकों और उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे।प्रदर्शनी में स्वदेशी अनुसंधान, आधुनिक उपकरणों और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित नए समाधानों को प्रस्तुत किया जाएगा।इसके साथ ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और तकनीकी प्रदर्शनों के जरिए वैज्ञानिक उपलब्धियों के व्यावहारिक उपयोग को समझाने की व्यवस्था की गई है।इस पहल से युवा उद्यमियों को उद्योग जगत और निवेशकों के साथ संपर्क स्थापित करने के अवसर मिलने की उम्मीद है।
वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने की पहल
सम्मेलन में 'ग्लोबल कनेक्ट नेटवर्किंग इवेंट' का आयोजन भी प्रस्तावित है।इसके अंतर्गत भारत और विदेशों के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों तथा उद्योगों से जुड़े 300 से अधिक आमंत्रित प्रतिभागी भाग लेंगे।इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान साझेदारी को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यावसायिक उपयोग में लाने के अवसर तैयार करना है।इसके माध्यम से भारतीय स्टार्टअप को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और संस्थानों के साथ सहयोग करने का अवसर मिलेगा।
छोटे शहरों के युवाओं को भी मिलेगा अवसर
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सम्मेलन की तैयारियों के दौरान कहा था कि भारत में नवाचार की अगली बड़ी लहर महानगरों के बाहर से भी आनी चाहिए।उन्होंने छोटे शहरों के स्टार्टअप को विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और बाजार से जोड़ने की आवश्यकता बताई।सरकार का प्रयास वैज्ञानिक अनुसंधान और उद्यमिता के अवसरों को अधिक व्यापक बनाना है, ताकि युवा प्रतिभाओं को अपने विचारों को वास्तविक उत्पादों में बदलने में सहायता मिल सके।इस सम्मेलन में युवा वैज्ञानिकों, महिला उद्यमियों और उभरते शोधकर्ताओं की भागीदारी पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा सम्मेलन
केंद्र सरकार विज्ञान और तकनीक को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का महत्वपूर्ण आधार मानती है।वैज्ञानिक अनुसंधान, अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी नवाचार से उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने की संभावनाएं हैं।ESTIC 2026 का उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों, सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करना है।तीन दिवसीय सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं और तकनीकी नीतियों को दिशा देने में सहायक हो सकते हैं।
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