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भारत रूस के रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार आज मोदी पुतिन की अहम बैठक

nidhi
31 Aug 2026 6:43 AM IST
भारत रूस के रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार आज मोदी पुतिन की अहम बैठक
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भारत रूस के बीच हो सकती है बड़ी डील

बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज यानी 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आमने-सामने बैठने वाले हैं। दोनों नेताओं की यह द्विपक्षीय बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर होगी। भारत सरकार ने मोदी-पुतिन की बैठक की पुष्टि की है। बदलते वैश्विक हालात के बीच होने वाली इस मुलाकात में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, उर्वरक, डिजिटल भुगतान और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले 26वें SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। इस बार SCO अपने 25 साल पूरे कर रहा है। प्रधानमंत्री सम्मेलन में भारत की सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर से जुड़ी प्राथमिकताओं को सामने रखेंगे। इसी दौरान अलग-अलग देशों के नेताओं के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठकों का कार्यक्रम भी रखा गया है। इनमें पुतिन के साथ होने वाली बैठक को भारत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
S-400 पर टिकी निगाहें
मोदी-पुतिन बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा रक्षा सहयोग को लेकर है। भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी रक्षा साझेदारी है और भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में रूसी मूल के प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में रक्षा आपूर्ति और भविष्य के सैन्य सहयोग पर बातचीत होने की संभावना है। इस बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि रूस ने भारतीय वायुसेना के लिए पांच अतिरिक्त S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस स्क्वाड्रन की खरीद से संबंधित भारतीय निविदा के जवाब में अपना प्रस्ताव सौंप दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय को यह प्रस्ताव मिल चुका है और इसकी समीक्षा की जा रही है। संभावित सौदे की कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। हालांकि इसे अभी अंतिम समझौता नहीं माना जाना चाहिए।
S-400 दुनिया की प्रमुख लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणालियों में शामिल है। भारत पहले ही रूस के साथ S-400 की खरीद का समझौता कर चुका है। पिछले साल दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की बातचीत में S-400 की आपूर्ति के साथ Su-30 MKI अपग्रेड और दूसरे महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों की खरीद तथा आपूर्ति में तेजी जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से सामने आए थे। ऐसे में मोदी और पुतिन की आज की बैठक में रक्षा संबंधों की समीक्षा होना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन के प्रस्ताव पर आज ही अंतिम मुहर लगेगी या नहीं, इसे लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
एनर्जी सहयोग भी रहेगा बड़ा मुद्दा
रक्षा के अलावा ऊर्जा भारत-रूस संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। रूस भारत के लिए तेल और दूसरे ऊर्जा संसाधनों का प्रमुख स्रोत रहा है। दोनों देशों के बीच तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में लंबे समय से सहयोग चल रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम है। रूस के साथ कच्चे तेल की खरीद और दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग ने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नया आयाम दिया है। मोदी-पुतिन बैठक में तेल और गैस आपूर्ति के साथ भविष्य के ऊर्जा निवेश तथा संयुक्त परियोजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है। भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग भी महत्वपूर्ण है। तमिलनाडु का कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र इस साझेदारी का प्रमुख उदाहरण है। दोनों देश शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग करते आए हैं।
किसानों के लिए उर्वरक आपूर्ति पर भी बात संभव
ऊर्जा के साथ उर्वरक भी दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का अहम क्षेत्र बन गया है। हाल में विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉस्को यात्रा के दौरान पुतिन ने ऊर्जा के अलावा भारत को उर्वरक की आपूर्ति का विशेष तौर पर उल्लेख किया था। पुतिन ने कहा था कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार है। जयशंकर ने भी भारत-रूस आर्थिक सहयोग में महत्वपूर्ण वृद्धि का उल्लेख किया था। इसलिए मोदी-पुतिन की बैठक में उर्वरक की दीर्घकालिक और भरोसेमंद आपूर्ति पर चर्चा होने की संभावना है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाद की उपलब्धता सीधे कृषि उत्पादन और किसानों की लागत से जुड़ी हुई है। यदि रूस से स्थिर कीमत और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होती है तो यह भारत के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
UPI और भुगतान व्यवस्था पर भी नजर
दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में भुगतान व्यवस्था लंबे समय से एक महत्वपूर्ण विषय रही है। भारत और रूस अपने आर्थिक रिश्तों को अधिक सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्थाओं को लेकर काम करते रहे हैं।
ताजा रिपोर्टों में मोदी-पुतिन बैठक के संभावित एजेंडे में डिजिटल भुगतान और UPI से जुड़े सहयोग को भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि आज की बैठक से पहले किसी नई UPI व्यवस्था या समझौते की अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए इसे संभावित चर्चा के मुद्दे के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा। यदि दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान की व्यवस्था आगे बढ़ती है तो इसका फायदा पर्यटकों, छात्रों और कारोबारियों को मिल सकता है। इसके साथ ही द्विपक्षीय व्यापार में भुगतान संबंधी बाधाओं को कम करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
व्यापार बढ़ाने पर जोर
भारत और रूस के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में पुतिन के साथ मुलाकात के दौरान भी कहा था कि दोनों देशों का आर्थिक सहयोग काफी बढ़ा है। अब कोशिश व्यापार को अधिक संतुलित और विविध बनाने की है। ऊर्जा और रक्षा के अलावा फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, खाद्य उत्पाद, मशीनरी, टेक्नोलॉजी, कनेक्टिविटी और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की गुंजाइश मौजूद है। भारत की कोशिश रूस को अपने निर्यात में वृद्धि करने और दोनों देशों के कारोबार को कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित न रखने की है। कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाएं भी इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बेहतर परिवहन और व्यापार मार्ग दोनों देशों के बीच सामान की आवाजाही का समय और लागत कम कर सकते हैं।
वैश्विक मुद्दों पर भी होगी चर्चा
मोदी और पुतिन की बातचीत केवल द्विपक्षीय व्यापार या रक्षा सौदों तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। दोनों नेताओं के सामने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी हैं। यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक ऊर्जा बाजार, आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय SCO शिखर सम्मेलन के दौरान चर्चा में रहने की संभावना है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्षों के समाधान पर जोर देता रहा है। रूस के साथ भारत के पुराने रणनीतिक संबंध हैं, वहीं अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भी नई दिल्ली की व्यापक साझेदारी है। ऐसे में मोदी-पुतिन वार्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी करीब से देखा जाएगा।
अगले महीने फिर मिल सकते हैं दोनों नेता
बिश्केक की बैठक भारत-रूस के बीच आने वाले उच्चस्तरीय संपर्कों की शुरुआत भी मानी जा सकती है। दोनों नेताओं के अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान फिर मिलने की संभावना है। विदेश मंत्री जयशंकर ने अपनी मॉस्को यात्रा के दौरान पुतिन से कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी SCO सम्मेलन में उनसे मिलने और उसके बाद भारत में उनका स्वागत करने को उत्सुक हैं। इससे साफ है कि भारत और रूस आने वाले महीनों में लगातार उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने की तैयारी में हैं। आज की बैठक में जिन मुद्दों पर सहमति बनती है, उन्हें आगे की बैठकों में ठोस समझौतों तक पहुंचाया जा सकता है।
भारत-रूस रिश्तों के लिए अहम दिन
कुल मिलाकर बिश्केक में मोदी-पुतिन की बैठक रक्षा से लेकर ऊर्जा और व्यापार तक भारत-रूस साझेदारी की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण वार्ता हो सकती है। सबसे ज्यादा नजर अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के रूसी प्रस्ताव पर रहेगी, जिसकी कीमत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा तेल-गैस, परमाणु ऊर्जा, उर्वरक आपूर्ति, डिजिटल भुगतान और व्यापारिक सहयोग जैसे विषय भी चर्चा में रह सकते हैं। हालांकि बैठक से पहले संभावित समझौतों को अंतिम डील मानना जल्दबाजी होगी। दोनों नेताओं की बातचीत के बाद जारी आधिकारिक बयान से ही स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों में ठोस सहमति बनी और किन मुद्दों को आगे की वार्ता के लिए रखा गया।
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