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अमेरिका में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत उत्सुक : एमईए
SHIDDHANT
27 March 2026 10:10 PM IST

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Delhi दिल्ली। नई दिल्ली में शुक्रवार को एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जी-7 बैठक में भारत की सहभागिता के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत इस वर्ष अमेरिका की अध्यक्षता में फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 सम्मेलन में भाग लेने के लिए उत्सुक है। उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने जी-7 से दक्षिण अफ्रीका को बाहर करने और जी-20 बैठक में दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित न करने की अमेरिका की योजना के खिलाफ विरोध किया।
इस पर जायसवाल ने कहा, "भारत एक आउटरीच देश है, जिसे मेजबान ने जी-7 बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह मेजबान पर निर्भर करता है कि वे किसे जानना चाहते हैं, किसे उन बैठकों में बुलाना चाहते हैं। मुझे लगता है कि इस बारे में कुछ रिपोर्टें हैं, इसलिए मैं आपको उसे देखने की सलाह दूंगा। जहां तक जी-20 की बात है, इस बार अमेरिका जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है और हम जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं, जो इस वर्ष बाद में सभी जी-20 देशों के साथ होगा।"
अमेरिका ने दिसंबर 2025 में जी-20 2026 की अध्यक्षता संभाली थी और इस वर्ष 14-15 दिसंबर को मियामी में जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है। जायसवाल ने यह भी उल्लेख किया कि विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर फ्रांस में चल रही जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग ले रहे हैं और इस कार्यक्रम के दौरान कई देशों के अपने समकक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे विदेश मंत्री पेरिस में जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में हैं। इस दौरान उन्होंने कई विदेश मंत्रियों, अपने समकक्षों के साथ बैठकें की हैं, जिनमें फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राजील शामिल हैं। वहां इन बैठकों का सिलसिला जारी है, क्योंकि आज भी कार्य दिवस है।''
जायसवाल ने बताया कि बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने दो सत्रों में भाषण दिया। एक सत्र वैश्विक शासन पर था, जहां उन्होंने सुरक्षा परिषद सुधार की आवश्यकता, शांति स्थापना अभियानों को सुव्यवस्थित करने और मानवतावादी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर बात की। उन्होंने वैश्विक दक्षिण देशों की खाद्य, ईंधन और उर्वरक पर चिंताओं से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। हम सभी देखते हैं कि इस संघर्ष का इन मुद्दों पर विश्व स्तर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
दूसरे सत्र में उन्होंने कनेक्टिविटी और आईएमईसी पर ध्यान केंद्रित किया और वहां भी उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्षों से उत्पन्न असुरक्षाओं और अधिक मजबूत व्यापार मार्गों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता पर चर्चा की।
आईएमईसी के संदर्भ में उन्होंने यूके और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ किए गए एफटीए और ईएफटीए देशों के साथ समझौते पर भी बात की और बताया कि यह क्यों महत्वपूर्ण हैं।
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