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भारत-जापान विज्ञान साझेदारी के 40 साल पूरे, मंत्री जितेंद्र सिंह ने गिनाईं उपलब्धियां
SHIDDHANT
6 April 2026 11:29 PM IST

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New Delhi/Tokyo नई दिल्ली/टोक्यो। भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को टोक्यो में भारतीय दूतावास में आयोजित 'भारत-जापान ईयर ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन एक्सचेंज' के ग्रैंड फिनाले में वर्चुअल भाषण दिया। उन्होंने इस अवसर पर चार दशकों से चल रही मजबूत द्विपक्षीय साझेदारी को रेखांकित किया। मंत्री सिंह ने कहा, ''सोमवार को भारत-जापान विज्ञान और प्रौद्योगिकी वर्ष के ग्रैंड फिनाले के मौके पर टोक्यो स्थित भारत के दूतावास में आप सभी से बात करना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।”
द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर उन्होंने कहा कि मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि भारत-जापान विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग हमारे अंतरराष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधों में एक मजबूत स्तंभ है। उन्होंने कहा, “मैं खुश हूं कि मैं आप सभी से वर्चुअली बात कर रहा हूं और इस वर्ष को मनाते हुए हम 40 साल के विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी को याद कर रहे हैं। भारत में नवाचार की बढ़ती भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सभी क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें शिक्षा संस्थान, आर एंड डी संस्थान, उद्यमी शामिल हैं और इसमें महिलाओं और युवा वैज्ञानिकों को समान अवसर भी मिलते हैं।”
उन्होंने हाल के वर्षों में हासिल किए गए कुछ महत्वपूर्ण कदम का जिक्र करते हुए बताया कि 11वीं भारत-जापान संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी समिति की बैठक 5 जून 2025 को नई दिल्ली में हुई थी, जिसने कई नए पहलों को आगे बढ़ाया। इसके अलावा पिछले साल 31 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान साइंस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में संबंधों को मजबूत करने के लिए एक जॉइंट स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट पर साइन किए गए थे। साथ ही जापान की मेडिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एजेंसी और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के बीच नया समझौता (एमओसी) भी हस्ताक्षरित हो चुका है।
वर्तमान सहयोगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जापान के सुकुबा में बनी इंडियन बीमलाइन भी लेटेस्ट रिसर्च में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी, लोटस प्रोग्राम लॉन्च कर रही है, जिसमें हर साल 1,000 भारतीय शोधकर्ताओं को आमंत्रित और समर्थन दिया जाएगा। हमने इसरो और जापान के जेएएक्सए के बीच चांद पर एक साथ उतरने के लिए एक इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट किया है।
भविष्य की साझेदारी पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हम जापान को एक भरोसेमंद साथी मानते हैं, जहां जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं। हम भारत और जापान के बीच एक संयुक्त केंद्र बनाने की उम्मीद रखते हैं, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार को तेज करेगा और दोनों देशों की वैज्ञानिक चुनौतियों, साथ ही सतत विकास जैसे वैश्विक लक्ष्यों को भी हल करेगा।
अपने संबोधन को समाप्त करते हुए उन्होंने भारत के जापान दूतावास को इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई दी।
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