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भारत-जापान रक्षा सहयोग में बड़ा कदम, UNICORN सिस्टम पर सहमति

नई दिल्ली : भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। टोक्यो के डिफेंस इक्विपमेंट एक्सपोर्ट पर बैन में ढील के बाद दोनों देशों ने मिलकर सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन (co-production) और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस पहल को दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
गुरुवार को दोनों पक्षों ने जापान के UNICORN कम्युनिकेशन सिस्टम के संयुक्त उत्पादन से जुड़ी बाधाओं को दूर कर दिया है। इस सिस्टम के जुड़ने से भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की स्टेल्थ क्षमताओं में महत्वपूर्ण सुधार होने की उम्मीद है। यह तकनीक समुद्री संचार और निगरानी प्रणाली को और अधिक उन्नत बनाने में मदद करती है।
इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। बैठक में समुद्री सुरक्षा, नौसेना अभ्यासों में वृद्धि और अंतरिक्ष आधारित तकनीक के उपयोग के जरिए समुद्री डोमेन अवेयरनेस को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
दोनों देशों ने यह भी तय किया कि नेवल मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाओं के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा “मेक इन इंडिया” पहल के तहत रक्षा उपकरणों और तकनीक के संयुक्त विकास और उत्पादन को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में सैटेलाइट तकनीक के उपयोग को लेकर भी सहमति बनी, जिससे समुद्री क्षेत्रों की निगरानी क्षमता और अधिक प्रभावी बनाई जा सके। इससे दोनों देशों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान द्वारा डिफेंस इक्विपमेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े तीन प्रमुख सिद्धांतों (three principles) की समीक्षा की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को और गहरा करेगा तथा भविष्य में उच्च तकनीकी सहयोग के नए अवसर खोलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच यह सहयोग केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे औद्योगिक विकास, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूती मिलेगी। UNICORN सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का भारत में संयुक्त निर्माण आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दोनों देशों के बीच बढ़ता यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल नौसेना क्षमताओं में सुधार होगा, बल्कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, भारत और जापान के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग का यह नया चरण दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाता दिखाई दे रहा है, जिसमें संयुक्त उत्पादन, तकनीक साझेदारी और समुद्री सुरक्षा पर विशेष फोकस किया गया है।





