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भारत-जापान-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया मिलकर बनाएंगे इंडो-पैसिफिक स्थिर: Jaishankar

Delhi दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश, जो समुद्री लोकतंत्र, विविध समाज और बाजार आधारित अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बनाए रखने की साझा जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह क्षेत्र वैश्विक विकास और स्थिरता के लिए एक प्रमुख प्रेरक शक्ति बना रहना चाहिए।
जयशंकर ने यह टिप्पणी क्वाड (Quad) सहयोग के संदर्भ में की, जहां चारों देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
उन्होंने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि इंडो-पैसिफिक में नियम आधारित व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि सभी देशों को समान अवसर मिल सकें और किसी एक शक्ति का दबदबा न रहे। जयशंकर के अनुसार, इन देशों की साझेदारी क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने और स्थिरता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रही है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि आज के समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और उभरती तकनीकें अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर अधिक निर्भर हो गई हैं। ऐसे में क्वाड देशों के बीच समन्वय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने संकेत दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना केवल क्षेत्रीय हित नहीं, बल्कि वैश्विक हित से भी जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
जयशंकर के अनुसार, भारत लगातार इस दिशा में काम कर रहा है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को एक खुला, समावेशी और नियम आधारित ढांचा मिले, जिसमें सभी देशों की भागीदारी हो। उन्होंने कहा कि क्वाड देशों की साझेदारी इसी लक्ष्य को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र बन गया है, जहां प्रमुख शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों देखने को मिलते हैं। ऐसे में क्वाड जैसे मंच क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कुल मिलाकर, विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि भारत और उसके साझेदार देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को वैश्विक विकास और शांति का प्रमुख आधार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।





