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दुनिया का भरोसेमंद मेड टेक पार्टनर बन रहा भारत PM मोदी का बड़ा बयान

Ratna Netam
8 Aug 2026 7:53 PM IST
दुनिया का भरोसेमंद मेड टेक पार्टनर बन रहा भारत PM मोदी का बड़ा बयान
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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत के तेजी से विकसित हो रहे मेडिकल टेक्नोलॉजी यानी मेड-टेक क्षेत्र की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने और सरकार की विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भारत एक भरोसेमंद वैश्विक मेड-टेक साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए भारत के मेड-टेक क्षेत्र में हो रहे बदलावों और आत्मनिर्भर मेडिकल टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का मेड-टेक सेक्टर घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के साथ लगातार मजबूत हो रहा है। सरकार की ओर से लागू की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसी पहलों को इस बदलाव में महत्वपूर्ण बताया गया है। सरकार का जोर मेडिकल उपकरणों के देश में ही निर्माण को बढ़ावा देने पर है, जिससे भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ वैश्विक बाजार में भी अपनी भूमिका मजबूत कर सके।
जेपी नड्डा ने अपने लेख में बताया कि मेडिकल उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर काम कर रही है। इनमें पीएलआई योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा-मेडटेक में अनुसंधान एवं नवाचार संवर्धन यानी पीआरआईपी योजना प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि पीएलआई योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। इससे देश में मेडिकल उपकरण निर्माण की क्षमता बढ़ने के साथ तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, मेडिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में विदेशी निवेश में भी लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। इसे भारत के मेडिकल डिवाइस बाजार में निवेशकों के बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने और लागत को कम करने में मदद मिल सकती है।
इसका सीधा फायदा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल उपकरणों की उपलब्धता और पहुंच बेहतर हो सकती है। देश में ही अधिक उपकरण बनने से स्वास्थ्य संस्थानों को जरूरी तकनीक उपलब्ध कराने में आसानी हो सकती है और लंबे समय में मरीजों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती बनाने में भी मदद मिल सकती है।
मेड-टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, सॉफ्टवेयर ऐज ए मेडिकल डिवाइस यानी एसएएमडी, कनेक्टेड मेडिकल डिवाइसेस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को भी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जेपी नड्डा के अनुसार, इन क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले वर्षों में इन तकनीकों के विस्तार से बीमारी की पहचान, मरीजों की निगरानी और उपचार से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव देखने को मिल सकता है।
जेपी नड्डा ने बताया कि वर्तमान में भारत का मेड-टेक बाजार करीब 15 से 16 अरब डॉलर का है और यह लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार बताया गया है और वैश्विक स्तर पर भी भारत शीर्ष 20 मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजारों में शामिल है। तेजी से बढ़ते इस बाजार को देखते हुए सरकार का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण के साथ-साथ भारत को वैश्विक मेडिकल डिवाइस सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण स्थान दिलाना है।
सरकार नियामकीय ढांचे को मजबूत करने, परीक्षण सुविधाओं के विस्तार और क्लीनिकल डेटा के विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही भारतीय कंपनियों द्वारा बनाए गए मेडिकल उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे घरेलू उत्पादों की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ाई जा सके।
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, मजबूत मेडिकल डिवाइस उद्योग का असर केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, निर्यात को गति मिल सकती है और नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहन मिल सकता है। घरेलू कंपनियों के लिए अनुसंधान और नवाचार के नए अवसर पैदा होने से भारत मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता को और मजबूत कर सकता है।
इसी सप्ताह जारी एक रिपोर्ट में भी भारत के मेडिकल डिवाइस उद्योग के भविष्य को लेकर संभावनाएं जताई गई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में करीब 14 अरब डॉलर मूल्य वाला भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र इस दशक के अंत तक 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र के करीब 250 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना भी जताई गई है।
कुल मिलाकर, सरकार की योजनाओं, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा और तकनीकी नवाचार के कारण भारत का मेड-टेक क्षेत्र तेजी से विस्तार की दिशा में बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस क्षेत्र की प्रगति को भारत के आत्मनिर्भर स्वास्थ्य तंत्र और वैश्विक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है। आने वाले समय में एआई, रोबोटिक्स, कनेक्टेड डिवाइसेस और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों के विस्तार के साथ भारत के मेड-टेक क्षेत्र की भूमिका और महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।
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