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भारत-जर्मनी मिलकर करेंगे वैश्विक स्थिरता और शांति मजबूत: मंत्री जयशंकर
SHIDDHANT
30 Oct 2025 8:19 PM IST

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Delhi दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और जर्मनी जैसे लोकतांत्रिक एवं प्रगतिशील देशों की दुनिया में बढ़ती रणनीतिक अनिश्चितता और आर्थिक अस्थिरता के दौर में विशेष भूमिका है। दोनों देशों पर यह जिम्मेदारी है कि वे मिलकर वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करें और शांति, प्रगति तथा समृद्धि को बढ़ावा दें। वे बुधवार को जर्मन नेशनल डे (German National Day) के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बोल रहे थे। जयशंकर ने कहा, “हम ऐसे समय में प्रवेश कर रहे हैं जब वैश्विक परिस्थितियां अनिश्चित और अस्थिर होती जा रही हैं। दुनिया में रणनीतिक अस्थिरता और आर्थिक उतार-चढ़ाव बढ़ रहा है। ऐसे में भारत और जर्मनी की साझेदारी एक स्थिर और भरोसेमंद वैश्विक ढांचे के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती है।”
विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश जीवंत लोकतंत्र, बहुलतावादी समाज और खुली बाजार अर्थव्यवस्था के प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि भारत-जर्मनी साझेदारी बहुआयामी और बहु-हितधारक है, जो व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण और जनसंपर्क जैसे कई क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रही है। जयशंकर ने कहा, “हमारी दो राष्ट्रों की साझेदारी तभी मजबूत होगी जब हम आपसी सम्मान और समझ के आधार पर गहरी केमिस्ट्री और भरोसेमंद संवाद को आगे बढ़ाएं। मुझे खुशी है कि हमारे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में निरंतर वृद्धि हो रही है। कई जर्मन कंपनियां भारत में दशकों से काम कर रही हैं, जिनमें कुछ तो सौ साल से भी पुरानी हैं।”
उन्होंने कहा कि जर्मनी भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं में एक अहम भागीदार है और भारत इस संबंध को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक है। “हमारे ग्रीन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है,” उन्होंने जोड़ा। जयशंकर ने कहा कि भारत-जर्मनी के संबंध अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जन-जन के रिश्तों में परिवर्तित हो चुके हैं। “हमारे बीच बढ़ते people-to-people exchanges इसका प्रमाण हैं। पिछले पांच वर्षों में जर्मनी में भारतीय छात्रों की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि कुशल पेशेवरों की आवाजाही में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह साझेदारी एक ऐसे मॉडल के रूप में उभर रही है जो वैश्विक कार्यबल के निर्माण में मार्गदर्शक बनेगी,” उन्होंने कहा।
विदेश मंत्री ने भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी सराहा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति और विदेशी विश्वविद्यालयों के सहयोग से दोनों देशों के छात्रों और शोधकर्ताओं को आपसी ज्ञान-साझेदारी के नए अवसर मिल रहे हैं। जयशंकर ने कहा, “आज भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बन चुका है और जर्मनी यूरोप की आर्थिक धुरी है। हमारी साझा प्राथमिकताएं — सतत विकास, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला, तकनीकी नवाचार, और वैश्विक आपूर्ति शृंखला की स्थिरता — हमें स्वाभाविक साझेदार बनाती हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी मिलकर हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, जलवायु अनुकूलन और नवाचार आधारित विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। “यह सहयोग आने वाले दशकों में न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए लाभकारी सिद्ध होगा,” उन्होंने कहा। कार्यक्रम में भारत में जर्मनी के राजदूत, वरिष्ठ राजनयिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और शिक्षाविद भी उपस्थित थे। जर्मन राजदूत ने भी भारत के साथ मजबूत साझेदारी की सराहना की और कहा कि भारत-जर्मनी संबंध आज विश्व शांति और वैश्विक प्रगति के नए स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। अंत में जयशंकर ने कहा, “भारत और जर्मनी के बीच सहयोग केवल साझेदारी नहीं, बल्कि विश्वास और मूल्यों का रिश्ता है। आने वाले वर्षों में यह संबंध वैश्विक स्थिरता, सतत विकास और मानवता के हित में एक नई दिशा तय करेगा।
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