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BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत-चीन के बीच आर्थिक मुद्दों पर नजर

नई दिल्ली। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण रहने वाली है। सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। उनके साथ एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ सकता है।
ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों, निवेश और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत की ओर से चीन से आयात होने वाली हाईटेक वस्तुओं को लेकर आ रही दिक्कतों और चीन में भारतीय कंपनियों के सामने मौजूद निवेश संबंधी चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया जा सकता है।
BRICS सम्मेलन में आर्थिक मुद्दों पर फोकस
BRICS समूह में भारत और चीन दोनों महत्वपूर्ण सदस्य देश हैं। इस संगठन का उद्देश्य आर्थिक सहयोग बढ़ाना और विकासशील देशों के बीच आपसी संबंध मजबूत करना है।
नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन को केवल राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार जारी है, लेकिन कई क्षेत्रों में असंतुलन और प्रतिबंधों को लेकर चिंताएं भी बनी हुई हैं।
सम्मेलन के दौरान भारत इन मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर सकता है।
हाईटेक आयात में आ रही समस्याएं
भारत और चीन के बीच व्यापार का बड़ा हिस्सा तकनीकी और औद्योगिक उत्पादों से जुड़ा है। भारत कई हाईटेक वस्तुओं, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए चीन पर निर्भर है।
हालांकि, भारत की ओर से कई बार यह चिंता जताई गई है कि कुछ क्षेत्रों में चीन से आने वाले तकनीकी उत्पादों और उपकरणों के आयात में चुनौतियां सामने आती हैं।
भारत चाहता है कि व्यापार प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो और भारतीय कंपनियों को आवश्यक तकनीक और उत्पादों तक बेहतर पहुंच मिले।
चीन में भारतीय कंपनियों के निवेश का मुद्दा
भारत की ओर से चीन में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के सामने आने वाली समस्याओं का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।
भारतीय कंपनियां लंबे समय से चीन के बाजार में बेहतर अवसर और निवेश के लिए आसान माहौल की मांग करती रही हैं। इनमें नियामकीय बाधाएं, बाजार पहुंच और व्यापारिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
भारत चाहता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में संतुलन बने और कंपनियों को समान अवसर मिलें।
व्यापार घाटे को लेकर भारत की चिंता
भारत और चीन के बीच व्यापार संबंध काफी बड़े हैं, लेकिन व्यापार घाटा लंबे समय से एक प्रमुख मुद्दा रहा है।
भारत चीन से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों का आयात करता है, जबकि चीन को भारत से निर्यात अपेक्षाकृत कम है।
भारत लगातार इस असंतुलन को कम करने और अपने निर्यात को बढ़ाने पर जोर देता रहा है।
शी जिनपिंग की संभावित यात्रा पर नजर
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के BRICS सम्मेलन में शामिल होने की संभावना को देखते हुए कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
यदि दोनों देशों के शीर्ष नेता बातचीत करते हैं तो आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने के अलावा अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
हाल के वर्षों में भारत और चीन के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। ऐसे में किसी भी स्तर की सकारात्मक बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की भूमिका अहम
शी जिनपिंग के साथ आने वाले कारोबारी प्रतिनिधिमंडल को लेकर भी खास उम्मीदें हैं। व्यापारिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी से दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच संवाद बढ़ सकता है।
भारत चाहता है कि दोनों देशों के कारोबारी संबंध केवल आयात-निर्यात तक सीमित न रहें, बल्कि निवेश और साझेदारी के नए अवसर भी विकसित हों।
भारत की रणनीति: सहयोग के साथ सतर्कता
भारत चीन के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन साथ ही अपनी आर्थिक सुरक्षा और घरेलू उद्योगों के हितों को लेकर सतर्क भी है।
सरकार लगातार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर दे रही है।
ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान भारत का रुख सहयोग और संतुलन दोनों पर आधारित रहने की संभावना है।





