दिल्ली-एनसीआर

SIR के खिलाफ INDIA गठबंधन की हुंकार

Kiran
2 Nov 2026 8:29 AM IST
SIR के खिलाफ INDIA गठबंधन की हुंकार
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नई दिल्ली, रविवार को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की 'चलो दिल्ली' रैली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठी। यहाँ कथित "वोट चोरी" को लेकर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई और BJP पर तीखे हमले किए गए। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर बढ़ते गुस्से को एक एकजुट राजनीतिक अभियान में बदलने की कोशिश की। 'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, RJD, वामपंथी दल और अन्य विपक्षी समूह एक मंच पर आए। नेताओं ने चुनाव आयोग पर चुनावी हेरफेर में मदद करने और मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।
रैली में राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के जेल जाने की भविष्यवाणी की, ममता बनर्जी ने चुनाव प्रमुख का मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें "वैनिश कुमार" (गायब करने वाले कुमार) कहा, मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने की मांग की, और अखिलेश यादव ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए। BJP ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और पलटवार करते हुए विपक्ष पर जनादेश का अनादर करने का आरोप लगाया। रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव को "अवैध" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद मतदाता सूची से लगभग 13.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जबकि NDA और INDIA गठबंधन के बीच वोट-शेयर का अंतर केवल तीन प्रतिशत था। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, "मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि ज्ञानेश कुमार को CEC के पद से हटा दिया जाएगा। ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे।" उन्होंने चुनाव प्रमुख पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले में शामिल होने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने कथित 'वोट चोरी' को लेकर मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी, लेकिन साथ ही कहा कि विपक्ष का अभियान अहिंसक बना रहेगा। उन्होंने कहा, "हम नरेंद्र मोदी, अमित शाह या ज्ञानेश कुमार से नफरत नहीं करते। हम 'मोहब्बत की दुकान' खोलने वाले लोग हैं; हम अहिंसा में विश्वास करते हैं।" तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल भी इस SIR प्रक्रिया का शिकार हुआ है। उन्होंने BJP पर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए मतदाता सूची में बदलाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "हम हारे नहीं, हमें हराया गया है। हम लोकतांत्रिक तरीके से इसका मुकाबला करेंगे।" उन्होंने 'SIR' (एसआईआर) को "बीजेपी जैसी पार्टी के लिए 'स्पेशल इंटेंसिव रिलीफ' (विशेष राहत)" करार दिया।
कुमार पर तंज कसते हुए ममता ने पूछा, "वैनिश कुमार जी, आप कब गायब होंगे? हम इंतजार कर रहे हैं।" उन्होंने 'जेन जेड' (Gen Z) प्रदर्शनकारियों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रति अपना समर्थन जताया और अलग-अलग समुदायों व राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सहित बीजेपी की कई सरकारें 'चुराए गए जनादेश' (stolen mandates) से बनी हैं। उन्होंने मोदी और शाह पर मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का आरोप भी लगाया।
खड़गे ने नारा दिया, "मोदी को हटाओ, लोकतंत्र को बचाओ।" उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री को हटाने की मांग की। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह मतदान के अधिकार को केवल अपने समर्थकों तक सीमित रखना चाहती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा, "बीजेपी चाहती है कि केवल उसके सदस्य ही भारत के मतदाता और नागरिक बनें।" आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने महाभारत का जिक्र करते हुए चुनावी धांधली की तुलना शकुनि के कपटपूर्ण पासे के खेल से की।
उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और सीमा खन्ना से जुड़े एक कथित सॉफ्टवेयर इंतजाम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने टेंडर दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग की और संवैधानिक संस्थाओं पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। इस रैली में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी, CPI के महासचिव डी. राजा और CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य समेत कई अन्य नेता शामिल हुए।
इससे पहले, 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के वरिष्ठ नेता मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से रामलीला मैदान तक एक खुली बस में गए। उनके साथ समर्थक भी थे, जो पार्टी के झंडे और तख्तियां लिए हुए थे। यह लामबंदी शनिवार को खड़गे के आवास पर कुमार के खिलाफ आयोजित एक प्रतीकात्मक "जन महाभियोग" (public impeachment) के बाद हुई। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुई इस कार्यवाही के दौरान, विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और उन पर मुकदमा चलाने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया; हालाँकि, इस प्रस्ताव का कोई संवैधानिक या कानूनी आधार नहीं था।
रैली से पहले रामलीला मैदान के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। पुलिसकर्मी लाठियां और ढालें ​​लिए हुए थे, कार्यक्रम स्थल के पास दंगा-रोधी वाहन तैनात किए गए थे, और मार्च के रास्ते पर ट्रैफिक को दूसरी तरफ मोड़ने की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा, प्रतिभागियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेड्स, अलग-अलग प्रवेश द्वार और तय किए गए घेरे भी बनाए गए थे।
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