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Election आयोग की स्वतंत्रता जरूरी, उम्मीदवारों पर निर्भरता से निष्पक्षता खतरे में: जस्टिस नागरत्ना

Delhi दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने शनिवार को पटना में चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी में राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल लेक्चर के दौरान चुनावों की ईमानदारी बनाए रखने में इलेक्शन कमीशन की स्वतंत्रता और महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर चुनावों के संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारी उन पर निर्भर रहें जो चुनाव लड़ रहे हैं, तो पूरे प्रक्रिया की न्यूट्रैलिटी और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं हो सकती।
जस्टिस नागरत्ना ने 1995 के सुप्रीम कोर्ट फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय अदालत ने इलेक्शन कमीशन को एक संवैधानिक अथॉरिटी के रूप में मान्यता दी थी, जिसे देश में चुनावों की ईमानदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि आज भी यह चिंता स्ट्रक्चरल रूप से मौजूदा है। उनका कहना था कि बैलेट की देखरेख करने वालों और चुनाव आयोग के अधिकारियों की आज़ादी को संरक्षित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा, "चिंता, एक बार फिर, स्ट्रक्चरल है। अगर चुनाव कराने वाले लोग उन पर निर्भर हैं जो खुद चुनाव लड़ते हैं, तो पूरे प्रोसेस की निष्पक्षता और न्यूट्रैलिटी पर सवाल उठ सकते हैं।" उनका यह बयान चुनाव आयोग की स्वतंत्रता की आवश्यकता और संवैधानिक सुरक्षा पर प्रकाश डालता है।
उन्होंने अपने लेक्चर में चुनाव आयोग की भूमिका और संवैधानिक महत्व को समझाते हुए कहा कि चुनाव आयोग केवल मतदान कराने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की नींव में एक स्थायी स्तंभ के रूप में काम करता है। जस्टिस ने स्पष्ट किया कि बैलेट की देखरेख करने वालों और चुनाव आयोग के अधिकारियों को हर तरह के दबाव से मुक्त रहना चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।
जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर कई बार सवाल उठते रहे हैं, और यह लोकतंत्र की मजबूती के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव प्रक्रिया के लिए अधिकारियों की स्ट्रक्चरल आज़ादी बनाए रखना न केवल आवश्यक है, बल्कि यह संवैधानिक आवश्यकता भी है।
उन्होंने अपने लेक्चर में यह भी बताया कि चुनाव आयोग के अधिकारी और बैलेट की देखरेख करने वाले लोग संवैधानिक रूप से अपने फैसलों में स्वतंत्र होने चाहिए। किसी भी राजनीतिक दबाव या राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप से उनकी निष्पक्षता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
जस्टिस नागरत्ना ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि लोकतंत्र की जड़ें मजबूत तभी रहेंगी जब चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र की मजबूती में चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अंत में सभी कानूनविदों और नागरिकों से अपील की कि वे चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और आयोग की स्वतंत्रता के महत्व को समझें और इसके प्रति जागरूक रहें।





