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नई दिल्ली। भारत के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने तमिलनाडु से बुल्गारिया के लिए ऑर्गेनिक पल्मायरा गुड़ पाउडर की पहली निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाई है। गुरुवार को तमिलनाडु के इरोड जिले के गोबिचेट्टीपलायम से 1.755 मीट्रिक टन गुड़ पाउडर के निर्यात की शुरुआत की गई।यह उत्पाद राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) और यूरोपीय संघ (EU) के जैविक मानकों के तहत प्रमाणित है। इस पहल का उद्देश्य तमिलनाडु के पारंपरिक कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ना और जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना है।
चेन्नई बंदरगाह से बुल्गारिया भेजी जाएगी खेप
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इस पहली निर्यात खेप को इरोड की कंपनी मेसर्स वेलबीइंग फूड्स ने चेन्नई की मेसर्स चेट्टी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से तैयार किया है।गुड़ पाउडर की यह खेप समुद्री मार्ग से चेन्नई बंदरगाह के जरिए बुल्गारिया के वर्ना शहर भेजी जाएगी। बुल्गारिया की मेसर्स सो लाइफ लिमिटेड इस उत्पाद की आयातक और वितरक कंपनी है।इस निर्यात के माध्यम से तमिलनाडु के स्थानीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
137 एकड़ में जैविक खेती से जुड़े किसानों को लाभ
इस पहल के तहत लगभग 137 एकड़ क्षेत्र में जैविक खेती शामिल है। इससे जुड़े किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।मंत्रालय के मुताबिक, इस निर्यात व्यवस्था के माध्यम से किसानों को घरेलू बाजार के मुकाबले लगभग 15 से 22 प्रतिशत अधिक कीमत मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं, उत्पाद तैयार करने वाली कंपनी को लगभग 17 प्रतिशत अधिक कीमत प्राप्त होने की बात कही गई है।बेहतर कीमत मिलने से जैविक खेती से जुड़े उत्पादकों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
पारंपरिक ताड़ के गुड़ को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
पल्मायरा गुड़ पाउडर ताड़ के फूलों से प्राप्त रस से तैयार किया जाने वाला पारंपरिक मिठास देने वाला उत्पाद है। तमिलनाडु में ताड़ के पेड़ों का कृषि और सांस्कृतिक महत्व रहा है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इनसे कई प्रकार के खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं।अब इसी पारंपरिक उत्पाद को आधुनिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग और जैविक प्रमाणन के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इससे स्थानीय उत्पादन और विदेशी मांग के बीच नया व्यापारिक संबंध स्थापित हो सकता है।
APEDA के अध्यक्ष ने दिखाई हरी झंडी
इस पहली निर्यात खेप को APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव ने हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में APEDA की सचिव डॉ. शाश्वती बोस, वरिष्ठ अधिकारी, निर्यातक कंपनियों के प्रतिनिधि और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक उपस्थित रहे।APEDA प्रमाणित जैविक और मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बाजार विकास, गुणवत्ता मानकों के पालन और विदेशी खरीदारों के साथ संपर्क स्थापित करने में सहयोग करता है।
किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
इस निर्यात से तमिलनाडु के पारंपरिक ताड़ आधारित उत्पादों के लिए नए विदेशी बाजार खुलने की उम्मीद है। साथ ही किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों के बीच बेहतर कारोबारी संबंध विकसित हो सकते हैं।विशेषज्ञों के लिए यह पहल इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार करके उनकी बाजार पहुंच बढ़ाई जा सकती है। भविष्य में निर्यात मांग बढ़ने पर जैविक खेती से जुड़े किसानों को अतिरिक्त आर्थिक अवसर मिल सकते हैं।
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