दिल्ली-एनसीआर

Delhi में 50 फीसदी काम भी पूरा नहीं हुआ नालों की सफाई में सुस्ती देखि जा रही है

Ashish verma
26 May 2025 10:53 PM IST
Delhi में 50 फीसदी काम भी पूरा नहीं हुआ नालों की सफाई में सुस्ती देखि जा रही है
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नालों की सफाई में सुस्ती

New Delhi.नई दिल्ली: मानसून के समय से पहले आने की संभावना के बीच गहरे नालों की सफाई में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की सुस्ती चिंता का विषय बन गई है। एमसीडी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 800 गहरे नालों (चार फीट से अधिक गहरे) में से सिर्फ 43 फीसदी की ही गाद साफ हो पाई है, ये आंकड़े 23 मई तक के हैं। एमसीडी से मिली जानकारी के अनुसार इस साल कुल 1.29 लाख मीट्रिक टन (एमटी) गाद निकालने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक सिर्फ 55,410 मीट्रिक टन गाद ही एकत्र कर लैंडफिल साइट्स तक पहुंचाई जा सकी है। 31 मई तक नाला सफाई का 80 फीसदी काम पूरा करने का लक्ष्य एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि काम में हो रही देरी को देखते हुए सभी जोनल अधिकारियों को 31 मई तक 80 फीसदी काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन पर कार्रवाई से बचा जा सके।

सफाई का पहला चरण 1 जनवरी से 31 मई तक चलता है, जिसमें कुल लक्ष्य का 60 प्रतिशत सफाई कार्य हो जाता है। इसका उद्देश्य बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को कम करना है। इस समय सीमा को अक्सर 15 जून तक बढ़ा दिया जाता है। इसके बाद मानसून के बाद दूसरा चरण शुरू होता है ताकि नालों में पानी का बहाव सुचारू रहे। 628 नालों की सफाई जारी, 43 जगहों पर काम पूरा एमसीडी के पास कुल 800 गहरे नाले हैं, जिनकी लंबाई 530 किलोमीटर है। सभी 12 जोन में सफाई का काम ठेका एजेंसियों को सौंपा गया है। जो मशीनों की मदद से नालों से गाद निकालकर उसे भलस्वा और गाजीपुर लैंडफिल साइट पर पहुंचा रही हैं। ओखला लैंडफिल साइट पर अभी डंपिंग नहीं हो रही है।

628 नालों में अभी सफाई का काम चल रहा है जबकि 43 जगहों पर काम पूरा हो चुका है। मानसून के बाद 84,466 टन गाद निकालने का लक्ष्यदूसरे चरण यानी मानसून के बाद एमसीडी ने 84,466.6 मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा है। इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल गाद निकालने का लक्ष्य 2,13,859.5 मीट्रिक टन रखा गया हैअधिकारी के अनुसार, फरवरी में ही एजेंसियों को काम सौंप दिया गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से काम में देरी हुई।अब अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि काम युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए, ताकि मानसून से पहले नालों की सफाई सुनिश्चित की जा सके।


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