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नोएडा फ्लैट विवाद में सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश

Ratna Netam
2 Oct 2026 9:27 PM IST
नोएडा फ्लैट विवाद में सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश
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नई दिल्ली। नोएडा में मल्टी-स्टोरी फ्लैट के आवंटन से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना को एक सदस्यीय हाई-पावर स्वतंत्र समिति के रूप में नियुक्त किया है। यह समिति फ्लैट पाने के हकदार वास्तविक सदस्यों और बाद में फ्लैट खरीदने वाले लोगों की सूची की जांच करेगी और पात्र लोगों की अंतिम सूची तैयार करेगी।
यह मामला केंद्रीय कर्मचारी सहकारी GN समिति से जुड़े विवाद से संबंधित है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में फ्लैट आवंटन और दावेदारों की पात्रता को लेकर विवाद बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद मामला पूरी तरह हल नहीं हो पाया है। इसी को देखते हुए अब स्वतंत्र समिति के माध्यम से दावों की जांच कराने और पात्र लोगों की सूची को अंतिम रूप देने का फैसला किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले वर्ष 2022 में भी इस मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। अदालत ने न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी NOIDA को सोसाइटी के 844 पहचाने गए सदस्यों को मल्टी-स्टोरी फ्लैट आवंटित करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही बाद में फ्लैट खरीदने वाले 133 लोगों के दावों की भी जांच करने को कहा गया था।
इसके बावजूद पात्र सदस्यों और बाद के खरीदारों के दावों से जुड़ा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। अदालत के सामने मामला दोबारा आने पर यह बात सामने आई कि पूर्व निर्देशों के बावजूद कई मुद्दों का समाधान बाकी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने अब एक स्वतंत्र व्यवस्था बनाते हुए पूर्व न्यायाधीश को जिम्मेदारी सौंपी है।
जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना की एक सदस्यीय समिति का प्रमुख काम उन लोगों की सूची की जांच करना होगा, जो सोसाइटी के वास्तविक सदस्य होने के आधार पर फ्लैट पाने का दावा कर रहे हैं। इसके अलावा समिति उन लोगों के दावों की भी जांच करेगी, जिन्होंने बाद में संबंधित फ्लैट खरीदे हैं। जांच के बाद पात्र लोगों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी।
इस प्रक्रिया का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि फ्लैट आवंटन से जुड़ा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। एक तरफ मूल सदस्यों के अधिकारों का सवाल है तो दूसरी तरफ बाद में संपत्ति खरीदने वाले लोगों के दावे भी सामने आए हैं। अब समिति को इन दावों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करके यह तय करना होगा कि किन लोगों का दावा स्वीकार किए जाने योग्य है।
सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से पात्रता और दावों को लेकर बनी स्थिति को स्पष्ट करने की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है। स्वतंत्र समिति की नियुक्ति का उद्देश्य पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच करना और पात्र लोगों की सूची को अंतिम रूप देना है। इससे फ्लैट आवंटन की आगे की प्रक्रिया में भी स्पष्टता आने का रास्ता बनेगा।
वर्ष 2022 में दिए गए आदेश के तहत 844 पहचाने गए सदस्यों को फ्लैट आवंटित करने की बात कही गई थी। साथ ही 133 बाद के खरीदारों के दावों की जांच का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इसके बाद भी विवाद खत्म नहीं होने के कारण अदालत को एक बार फिर हस्तक्षेप करना पड़ा।
अब पूर्व जज जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना के नेतृत्व वाली एक सदस्यीय समिति उपलब्ध दस्तावेजों, सदस्यता से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित दावों की जांच के आधार पर सूची को अंतिम रूप देगी। इससे यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि वास्तव में कौन फ्लैट पाने का हकदार है और बाद में फ्लैट खरीदने वाले लोगों के दावों में से किन पर विचार किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्वतंत्र समिति बनाए जाने से यह भी स्पष्ट है कि अदालत लंबे समय से लंबित इस विवाद का व्यवस्थित समाधान चाहती है। अदालत के पहले के आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अब पूरी प्रक्रिया की निगरानी स्वतंत्र स्तर पर होगी।
नोएडा में संपत्ति और फ्लैट आवंटन से जुड़ा यह मामला बड़ी संख्या में लोगों के हितों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में पात्र सदस्यों और खरीदारों की सही पहचान सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। समिति की जांच पूरी होने और अंतिम सूची तैयार होने के बाद इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान की दिशा में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।
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