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भारतीय सेना के शीर्ष कमांडरों की अहम बैठक तीन दिन तक सुरक्षा पर मंथन
Ratna Netam
21 Oct 2026 9:28 PM IST

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नई दिल्ली। देश की सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य की युद्ध रणनीतियों को लेकर भारतीय सेना का शीर्ष स्तरीय द्विवार्षिक 'आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस' बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हो गया। तीन दिवसीय इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में सेना के वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य तैयारियों, आधुनिक हथियार प्रणालियों और बदलते युद्ध के स्वरूप पर चर्चा कर रहे हैं। थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन 23 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी हिस्सा लेंगे और भारतीय सेना की नई 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन' जारी करेंगे। इस दस्तावेज का उद्देश्य भविष्य के युद्धों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना को रणनीतिक दिशा प्रदान करना है।
तीन दिनों तक सुरक्षा चुनौतियों पर होगा मंथन
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस भारतीय सेना का सर्वोच्च स्तरीय द्विवार्षिक मंच है।इस सम्मेलन में सेना के विभिन्न कमानों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ जुटकर देश की वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों और सैन्य क्षमताओं की समीक्षा करते हैं।इस बार सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलते सुरक्षा वातावरण का आकलन करना, परिचालन तैयारियों को मजबूत बनाना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं को विकसित करना है।इसके अलावा सेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकों को शामिल करने से जुड़ी पहलों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे संबोधित
तीन दिवसीय सम्मेलन को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संबोधित करेंगे।इस दौरान रक्षा मंत्री भारतीय सेना की नई 'लैंड वारफेयर डॉक्ट्रिन' जारी करेंगे। यह दस्तावेज आधुनिक युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप सेना की तैयारियों को दिशा देने के लिए तैयार किया गया है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस नई रणनीति के माध्यम से भविष्य के संघर्षों में सामने आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए आवश्यक क्षमताओं पर व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जाएगा।इसका उद्देश्य सेना को अधिक सक्षम, आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना है।
आधुनिक तकनीक और युद्ध क्षमता पर विशेष ध्यान
बदलते वैश्विक सुरक्षा वातावरण में आधुनिक तकनीक की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क आधारित सैन्य संचालन जैसी तकनीकें भविष्य की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।ऐसे में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की जरूरतों और नई तकनीकों के उपयोग पर सम्मेलन में चर्चा की जाएगी।सेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और विभिन्न सैन्य इकाइयों के बीच समन्वय मजबूत बनाने से जुड़े विषय भी सम्मेलन के एजेंडे में शामिल हैं।
सीडीएस और नौसेना प्रमुख भी रखेंगे विचार
सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, नौसेना प्रमुख और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव भी समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।इस दौरान बदलते सुरक्षा वातावरण में तकनीकी विकास और सशस्त्र बलों के बीच समन्वय के महत्व पर चर्चा होगी।थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल आधुनिक सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है।इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल क्षमताओं का विकास भी भविष्य की सैन्य तैयारियों का प्रमुख हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों को मिलेगा सम्मान
सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी वार्षिक पत्रिका का भी विमोचन करेंगे।इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले भारतीय सेना के जवानों और अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा।रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में भारतीय सैनिकों की सेवाओं तथा उनके पेशेवर योगदान को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाएगा।भारतीय सेना लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न शांति अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।
पर्यावरण संरक्षण और विमानन सुरक्षा पर पुरस्कार
सम्मेलन में सैन्य प्रतिष्ठानों के पर्यावरण संरक्षण और संसाधन प्रबंधन से जुड़े प्रयासों को भी सम्मानित किया जाएगा।थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सैन्य प्रतिष्ठानों को 'ग्रीन मिलिट्री स्टेशन' पुरस्कार प्रदान करेंगे।इसके अलावा सैन्य विमानन में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षित उड़ान संचालन के लिए 'एविएशन फ्लाइट सेफ्टी' पुरस्कार भी दिए जाएंगे।इन पुरस्कारों का उद्देश्य सेना में पर्यावरणीय जिम्मेदारी, संसाधनों के बेहतर उपयोग और सुरक्षित संचालन की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होगी भारतीय सेना
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सम्मेलन में सेना की मौजूदा योजनाओं की समीक्षा के साथ आगामी वर्षों की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की जाएगी।वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व भविष्य की आवश्यकताओं की पहचान करके उपयुक्त नीतिगत दिशाएं तय करने पर विचार करेगा।सम्मेलन के माध्यम से भारतीय सेना को तकनीकी रूप से सक्षम, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने वाली और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार सैन्य शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जाएगी।
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